गूगल पर संजोयेगा रेलवे अपनी धरोहर

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झांसी(ई एम एस)। रेलवे के इतिहास को देखने या समझने के लिए किसी किताब की जरूरत नहीं होगी। अब रेलवे अपने गौरवशाली अतीत को जीवित रखने के लिए ऐतिहासिक धरोहरों को गूगल पर संजोकर रखेगा। गूगल पर कहीं से भी कोई भी रेलवे का इतिहास देख सकेगा। रेल धरोहर में मंडल के झांसी, ग्वालियर समेत अन्य स्टेशनों को भी शामिल किया जाएगा।
भारतीय रेलवे का 166 साल पुराना इतिहास है। रेलवे का विकास देश की औद्योगिक प्रगति के साथ हुआ है। सभी मंडलोें के पास भवनों, पुलों, वस्तुओं और मशीनों का अपार भंडार है। देश के र्कई प्रमुख शहरों में रेल संग्रहालय बना रखे हैं जिनको देखने व जानने के लिए लोगों को संग्रहालय जाना पड़ता है। इससे देश नहीं विदेश में भी लोग रेलवे की धरोहरों से परिचित नहीं हैं। रेलवे ने गूगल आर्ट्स एंड कल्चर के सहयोग से रेल धरोहर डिजिटलीकरण परियोजना तैयार कराई है जिसमें देश में पहली बार वर्ष 1853 में मुंबई और ठाणे के बीच चलने वाली ट्रेन का इंजन, बोगी, स्टीम इंजन, बोगी, सिग्नल, टेलीफोन आदि की जानकारी होगी। झांसी मंडल के झांसी, ग्वालियर को शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

स्टेशनों पर लगाई जाएगी एलईडी
रेलवे की मुख्य धरोहरों से यात्री भी परिचित हो सकेंगे। इसके लिए मुख्य स्टेशनों पर एलईडी भी लगाने की तैयारी है। इन एलईडी पर मंडल के स्टेशनों की धरोहरों को समय – समय पर दिखाया जाएगा।

हर व्यक्ति तक रेलवे का इतिहास पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। रेलवे ने धरोहरों को गूगल आर्ट्स एंड कल्चर में फीड करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।