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सपा संगठन में हुआ फेरबदल राहुल महानगर और सुरेंद्र मुन्नी बने जिलाध्यक्ष

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। सपा संगठन में आखिरकार फेरबदल हो ही गया। करंट क्राइम ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि सपा संगठन में एक सप्ताह के भीतर फेरबदल होने वाला है। अब जिलाध्यक्ष रामकिशोर अग्रवाल और महानगर अध्यक्ष जेपी कश्यप के स्थान पर नए पदाधिकारियों की नियुक्ति हो गई है। महानगर अध्यक्ष पद पर राहुल चौधरी को दायित्व मिला है। राहुल चौधरी पहले भी महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं। यहां जिलाध्यक्ष पद पर पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार मुन्नी की ताजपोशी हुई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने राहुल चौधरी व सुरेंद्र मुन्नी के मनोनयन की घोषणा की है।
राजनैतिक मुआवजे का संदेश दे रही है ताजपोशी
जिलाध्यक्ष के रूप में पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार मुन्नी और महानगर अध्यक्ष के रूप में राहुल चौधरी की ताजपोशी को अनुभव और जोश का संगम माना जा रहा है। वही यह ताजपोशी डैमेज कंट्रोल का भी संदेश दे रही है। विधानसभा चुनाव में सुरेंद्र कुमार मुन्नी को सपा से टिकट मिला और एक रात में ही यह टिकट कट भी गया। मुन्नी कांग्रेस छोड़कर सपा में आए और टिकट मिलने के बाद भी कट गया।
इसी तरह जब सपा सरकार थी तो राहुल चौधरी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का करीबी होने के बाद भी पांच साल तक उपाध्यक्ष पद से ही काम चलाना पड़ा। उन्हें सरकार ने दर्जा प्राप्त मंत्री से लेकर किसी आयोग तक में सेट नहीं किया।
जब महानगर अध्यक्ष भी बनाया तो यह पद भी जल्द ही वापस ले लिया। इन सबके बाद भी दोनों सपा में ही बरकरार रहे। जानकार मान रहे हैं कि यह राजनैतिक क्षति का मुआवजा है। वैसे भी मुन्नी और राहुल के बीच ट्यूनिंग अच्छी बताई जाती है। दोनों एक-दूसरे की चिंता करते है। मुरादनगर विधानसभा का टिकट ही राहुल चौधरी की सिफारिश पर मिला बताया जाता है।
मुन्नी का अध्यक्ष बनना यूथ खेमे की टेंशन

पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार मुन्नी का जिलाध्यक्ष बनना सपा के यूथ खेमे के लिए टेंशन हो सकता है। इसका कारण भी यह है कि निगम चुनाव में वॉर्ड 50 के टिकट को लेकर पूर्व विधायक सुरेंद्र मुन्नी और यूथ खेमे के बीच ठन गई थी। मामला काफी आगे बढ़ा था और यूथ खेमे ने खुलकर सुरेंद्र कुमार मुन्नी का विरोध किया था। एक-दूसरे की शिकायतें भी की गई थी। यूथ खेमे के कहने पर वॉर्ड 50 का टिकट उनके द्वारा प्रस्तावित नेता को नहीं मिला था। हालांकि वॉर्ड 50 में सपा नहीं जीती और यहां भाजपा चुनाव जीत गई। वही यूथ खेमा भी छात्र संघ चुनाव में पूरी तरह फेल हो गया। यूथ के नेता सेल्फी में लगे रहे और छात्र संघ चुनाव में साइकिल चल ही नहीं पाई। अब जब जिलाध्यक्ष के रूप में सुरेंद्र कुमार मुन्नी आ गए है और महानगर अध्यक्ष भी राहुल चौधरी है तो ऐसे में यूथ खेमे के लिए भविष्य की राजनीति पर कोहरा सा छाता दिखाई दे रहा है।
राहुल और मुन्नी के लिए चुनौती भरा रहेगा कार्यकाल
सपा ने इस बार एक लंबे समय के बाद अलग कार्ड खेला है। यहां जाट और ब्राह्मण चेहरे को संगठन की कमान सौंपी गई है। हालांकि जाट के रूप में धर्मवीर डबास पहले भी महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं और राहुल चौधरी भी महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं। ब्राह्मण चेहरे के रूप में प्रह्लाद शर्मा महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं। अब यहां जो समीकरण सपा ने साधा है वह अपनी मुस्लिम और यादव समर्थक वाली छवि से बाहर आते हुए अनुभव और जोश का समीकरण है। सुरेंद्र कुमार मुन्नी कई बार विधायक रहे हैं। राजनीति का एक बड़ा नाम है और अपने समाज में एक विशेष स्थान रखते हैं। उन्हें जिलाध्यक्ष बनाकर सपा ने यहां मजबूत कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी दी है। सुरेंद्र कुमार मुन्नी को राजनीति का एक लंबा अनुभव है। विधायक रह चुके हैं। बड़ी बात यह है कि सुरेंद्र कुमार मुन्नी ने जिलाध्यक्ष पद मांगा नहीं है, उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुलाकर यह जिम्मेदारी दी है। वही राहुल चौधरी युवा नेता हैं, अखिलेश यादव के करीबी बताए जाते हैं। उच्च शिक्षित है और बेहतर वक्ता है। समाजवादी संघर्ष के पुराने साथी है। उनके कंधों पर यह दायित्व एक संदेश है। राहुल चौधरी यूथ हैं लेकिन उनके चिंतन में बूथ रहता है। लेकिन उनके सामने चुनौती सपा के ध्वस्त होते संगठन को खड़ा करने की रहेगी। सपा के पास यूथ के नाम पर चार या पांच नेता है। निगम में पांच पार्षद है। जो सरकार के समय खुद को सबसे बड़ा समाजवादी बताते थे, अब वह अपने समाज में बिजी है और सपा की साइकिल के लिए उनके पास समय नहीं है। जो व्यापार सभाओं में बड़े पद लेकर बैठे थे, वह अब खुद को हिंदुवादी और व्यापारी नेता बताने लगे है। यहां राहुल चौधरी को एक नई टीम का गठन करना होगा। पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार मुन्नी के बारे में कहा जाता है कि वह जनाधार वाले नेता है और उनके पास समर्थकों की एक बड़ी टीम है। जब चुनाव लड़ते है तो दल कोई भी हो वोट सुरेंद्र मुन्नी के नाम पर ही आता है। जिलाध्यक्ष के रूप में मुन्नी के लिए संगठन को लोनी से लेकर मुरादनगर तक एक नया आयाम देने के लिए मेहनत करनी होगी।

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