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रफ्ता रफ्ता मॉर्डन राजनीति की पहचान हो गए

करंट क्राइम (वरिष्ठ संवाददाता)
गाजियाबाद। चुनाव में भाजपा क्या जीती अच्छों अच्छों का मन एक रात में ही भगवा हो गया। सपा वाले कहने लगे कि हम तो बचपन से ही हिन्दुवादी हैं। और बसपा वालों ने कहना शुरू कर दिया कि देश को सही दिशा तो भाजपा ही दे सकती है। आधुनिक राजनीति की पहचान भी यही है। आज जब भाजपा में आने के लिए कई राजनीतिक चेहरे तड़प रहे हैं और भाजपा ने नो एंट्री का बोर्ड लगा
दिया है।
तब ऐसे में जिला पंचायत सदस्य पवन मावी ने एक करिश्मा किया। वह दिल्ली में एक कार्यक्रम में पहुंचे। भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ एक फोटो खिंचवाया और हो गए भाजपाई। जब यूपी में नो एंट्री है तो दिल्ली में जाकर उन्होंने भाजपा में एंट्री ले ली। दूर गामी सोच देखिये कि फोटो के साथ शोसल मीडिया पर सबूत भी दिया कि भाजपाई हो गया हूं। अब पवन मावी की ज्वाईनिंग को लेकर चर्चा शुरू हो गयी। जब दिल्ली से ज्वाईनिंग होनी है तो फिर यूपी वालों के सामने गिड़गिड़ाने की जरूरत क्या है। पवन मावी ने करंट क्राइम से बात चीत में कहा भी कि उन्होंने भाजपा ज्वाईन कर ली है। पवन मावी सपा जिला उपाध्यक्ष रहे हैं। राजनीति के अच्छे मैनेजर कहे जाते हैं। राजनीति में अच्छा मैनेजर वही होता है जो मौके पर अच्छे शॉट लगाए।
जदयू, सपा के बाद भाजपाई होने की कहानी
पवन मावी वर्ष 2012 में जदयू से विधानसभा चुनाव लड़े थे। वर्ष 2012 में जब सपा सत्ता में आई तो पवन मावी ने सपा में एंट्री ले ली। एंट्री का धमाका ऐसा कि जब सत्ताधारी दल सपा में जिलाउपाध्यक्ष बनने के लिए मारामारी मची थी तब पवन मावी ने अपने मैनेजमेंट से ये पद हासिल कर लिया। सपा में रहते हुए एक करिश्मा और किया। ईश्वर मावी उनके रिश्तेदार हैं। ईश्वर मावी की धर्मपत्नी जिस वार्ड से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ीं। पवन मावी ने उसी वार्ड से अपनी पत्नी को जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़वाया। पवन मावी साहिबाबाद में रहते हैं लेकिन अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाने के लिए वह लोनी पहुंच गए। सपा के समर्थन से चुनाव लड़े और जीत भी हांसिल कर ली। अब पवन मावी सपा के सत्ता से जाते ही दिल्ली वाले चैनल से भाजपा में आ गए।
भाजपा ज्वाईन करने के
पीछे का लिंक
पवन मावी को चुनावी खिलाड़ी माना जाता है। दिल्ली जाकर उनके भाजपा ज्वाईन करने का लिंक जिला पंचायत का चुनाव माना जा रहा है। अनिल कसाना मौजूदा जिला पंचायत सदस्य है। चर्चा जोरों पर है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने वाला है। पवन की पत्नी लोनी से जिला पंचायम सदस्य हैं। अनिल कसाना भी लोनी से जिला पंचायत सदस्य है। अनिल कसाना पुराने भाजपाई हैं। अब चर्चा है कि पवन मावी अगर किसी भी तरह अपने भाजपाई होने का लैटर ले आये तो अनिल कसाना के सामने दिक्कत हो सकती है। अनिल कसाना के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने की राह में पवन मावी रोड़ा न बन जाएं। यहां ये भी याद रहे कि सपा में रहते हुए पवन मावी ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में खुलकर सपा के आशु मलिक के खिलाफ बयान दिए थे।
नहीं हैं ऐसी ज्वाईनिंग के कोई मायने : सतेन्द्र शिशौदिया
भाजपा के क्षेत्रिय महामंत्री सतेन्द्र शिशौदिया ने कहा है कि ऐसी ज्वाईनिंग के कोई मायने नहीं हैं। पवन मावी की गिनती गाजियाबाद के भाजपा कार्यकर्ताओं में नहीं होगी। क्षेत्रिय महामंत्री सतेन्द्र शिशौदिया ने कहा कि पवन मावी ने दिल्ली में भाजपा ज्वाईन करने की कोई जानकारी नहीं दि है। ये पता है कि मुलाकात हुई है। मुलाकात तो किसी की भी हो सकती है। अगर उन्होंने भाजपा ज्वाईन की है तो वे सबूत दें। हम मान लेंगे हम अभी उनकी ज्वाईनिंग को नहीं मान रहे। ना उनका भाजपा से मतलब था और ना ही वह भाजपा में शामिल हुए हैं।
कैसे पता चले कि कौन है असली भाजपाई
पवन मावी के दिल्ली शॉट के आगे गाजियाबाद वाले भाजपाई भी चक्कर खा गए हैं। अब लोचा ये हैं कि भाजपाई की परिभाषा क्या है। क्षेत्रिय और गाजियाबाद के भाजपा नेताओं के लिए यह बड़ा सवाल है। भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है। जो दिल्ली में भाजपाई हो गया है तो क्या वह यूपी में भाजपाई नहीं रहेगा। पवन मावी कह रहे हैं कि वह भाजपाई हैं। क्षेत्रिय महांमंत्री सतेन्द्र शिशौदिया कह रहे हैं कि हम उन्हेंं भाजपाई नहीं मानते। सवाल ये है कि भाजपा की सदस्यता कोई आरटीओ का वाहन परमिट तो
है नहीं जो दिल्ली में चलेगा और यूपी में नहीं चलेगा। शुरू में हंगामा होता है और बाद में सब कुछ सामान्य हो
जाता है।

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