कांग्रेस के झूठे वायदों पर जनता को भरोसा नहीं : नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री ने लालपुर में विशाल आमसभा को किया संबोधित प्रत्येक मतदाता से मतदान करने की जा रही अपील जीका बुखार से बचाव के लिए सावधानी बरतें चिल्ड्रन होम में गार्ड द्वारा बच्चों नशीली दवा देने के मामले में हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब पीएम मोदी का खुला चैलेंज पहले 4 पीढ़ियों का हिसाब दो, मैं तो 4 साल का हिसाब दे रहा हूं इमली के बीज में छिपा है चिकनगुनिया का इलाज: आईआईटी वैज्ञानिक गेहूं की बुआई के लिए खेतों में पानी ना होने से संकट में 3 हजार किसान bhopal क्राईम ब्रांच कार्यालय के सामने से कार चोरी तेज रफ्तार कार ने बाईक को मारी टक्कर, एक की मौत दुसरा घायल सिग्नेचर ब्रिज पर निर्वस्त्र होने का वीडियो वायरल
Home / राज्य / छत्तीसगढ़ / एमपी-छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में भाजपा विधायकों के टिकट काटने की तैयारी

एमपी-छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में भाजपा विधायकों के टिकट काटने की तैयारी

नई दिल्ली (ईएमएस)। विधानसभा चुनाव 2018 में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा बड़ी संख्या में अपने वर्तमान विधायकों का टिकट काटने की तैयारी में है। इनमें से अधिकतर वे विधायक हैं जो दो बार से ज्यादा एक ही सीट से लगातार चुने गए हैं। 15 वर्षों से लगातार सत्ता में बने रहने से उपजी एंटी-इनकंबेंसी से निपटने के लिए भाजपा ने यह फार्मूला निकाला है। पार्टी नेतृत्व की माने तो लोगों की नाराजगी दो स्तर पर होती है। पहली मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रही राज्य सरकार से और दूसरी स्थानीय विधायक से। चूंकि मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बदला जा सकता है इसलिए काम न करने वाले विधायक का टिकट काट दिया जाएगा। इस बार आधे से अधिक विधायकों को टिकट नहीं दिए जाने की संभावना है। इनमें से कुछ विधायकों की सीट बदल दी जाएगी लेकिन अकर्मण्यता की शिकायत वाले ऐसे विधायक जो अपने काम के बजाय केवल पार्टी के नाम पर ही जीत कर आते हैं, उनको इस बार मैदान में नहीं उतारा जाएगा। इसके लिए भाजपा ने कई सर्वेक्षण कराए हैं, जिनमें उम्मीदवारों को विधानसभा में प्रदर्शन, विधायक निधि के इस्तेमाल, क्षेत्र में कराए विकास कार्य और मतदाताओं के बीच लोकप्रियता जैसे पैमानों पर कसा है। चूंकि राजस्थान में पार्टी केवल पिछले 5 सालों से ही सत्ता में है, इसलिए वहां ज्यादा विधायकों के टिकट नहीं काटे जाएंगे। वहां मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रति लोगों की नाराजगी बहुत अधिक है। साथ ही राज्य भाजपा इकाई कई धड़ों में बंटी हुई है। हालांकि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बतौर केंद्रीय पर्यवेक्षक, अधिकतर नेताओं को बातचीत करने पर राजी तो कर लिया, लेकिन सीएम के प्रति नाराजगी को कम करने का मंत्र फिलहाल उनके पास नहीं है। ऐसे पार्टी को सबसे बड़ी उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है जो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार खत्म करने के बाद राजस्थान पर पूरा ध्यान लगाएंगे। चूंकि राजस्थान का चुनाव इन दोनों राज्यों के चुनाव के 10 दिन बाद होना है, इसलिए भाजपा को उम्मीद है कि इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ सभी वरिष्ठ नेताओं की प्रतिदिन दो से तीन सभाओं से राजस्थान के चुनाव का मिजाज बदल सकता है।

Check Also

इमली के बीज में छिपा है चिकनगुनिया का इलाज: आईआईटी वैज्ञानिक

रुड़की (ईएमएस)। आईआईटी रुड़की के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिकों की टीम ने एक शोध …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *