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‘पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाएं राजनीतिक दल’

पटना| बिहार के सिविल सोसाइटी संगठनों तथा सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड ) ने शुक्रवार को पटना में प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक परामर्श बैठक की, जहां उनसे बिहार में जलवायु परिवर्तन के परिणामों को गंभीरता से लेने और आगामी चुनाव में इसके समाधान के लिए संकल्प लेने की अपील की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में ‘जलवायु घोषणापत्र’ (क्लाइमेट मैनिफेस्टो) के निर्माण में सबके सुझाव और विचार लेना था।

बिहार में जलवायु परिवर्तन के कारण भारी पैमाने पर सामाजिक, आर्थिक क्षति हो रही है। नेशनल इनिशिएटिव ऑन क्लाइमेट रिजिलिएंट एग्रीकल्चर के अनुसार राज्य के 38 जिलों में से 24 जिले गंभीर और 12 जिले काफी संवेदनशील हैं। भारत के गंगा मैदानी क्षेत्र के 161 जिलों की संवेदनशीलता सूची के टॉप 20 जिलों में बिहार के 16 जिले आते हैं।

क्लाइमेट सल्यूशंस के विषय पर सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रयास की सराहना करते हुए सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि, “बिहार सरकार ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके तहत जल-जीवन-हरियाली मिशन एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।”

उन्होंने कहा, “जदयू निश्चित तौर पर चुनाव में क्लाइमेट समाधान को चुनावी एजेंडा बनाएगा और इसी के अनुरूप अपने घोषणापत्र में क्लाइमेट सल्यूशंस को महत्वपूर्ण जगह देगा।”

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता डॉ. निखिल आनंद ने कहा, “भाजपा जलवायु संकट को गंभीरता से ले रही है। हम सुनिश्चित करेंगे कि हमारी पार्टी के घोषणापत्र में क्लाइमेट समाधानों को प्रमुखता से जगह मिले, जिससे बिहार विकास के रास्ते पर अग्रसर हो।”

राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “बिहार में कृषि समस्या के निदान के लिए क्लाइमेट समाधान की जरूरत है। हम निश्चय ही इसे चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाएंगे।”

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता डॉ. हरखू झा ने कहा कि, “जलवायु परिवर्तन का असर व्यापक है और ग्रामीण क्षेत्र के गरीब लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इस चुनाव में क्लाइमेट सल्यूशंस को अपने घोषणापत्र में शामिल करने का प्रयास करेंगे।”

इस मौके पर सीड के सीईओ रमापति कुमार ने कहा, “बिहार गंभीर जलवायु संकट से जूझ रहा है और मैं सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील करता हूं कि वे इस चुनौती को गंभीरता को समझें और क्लाइमेट चेंज के दुष्प्रभावों को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाएं।”

उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अपने नेताओं से डिसेंट्रलाइज्ड रिन्यूएबल एनर्जी (डीआरई) मिशन, क्लीन एयर मिशन, प्रभावी सिंचाई प्रणाली, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्घार और हानिकारक अपशिष्ट संकट के समाधान जैसे मुद्दों पर नेतृत्व की उम्मीद कर रही है।

इस अवसर पर ‘किसान चाची’ राजकुमारी देवी ने भी अपनी बात रखी।

बैठक में कई अन्य संगठनों, पत्रकारों, पर्यावरण से जुड़े लोगों ने अपनी बात रखी।

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