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उत्तर प्रदेश

यूपी में विस चुनाव-2022 के लिए राजनीतिक दलों की कवायद शुरू

बसपा की सोशल इंजीनियरिंग तो सपा का परशुराम प्रेम दिखा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विस चुनाव-2022 के लिए राजनीतिक दलों की कवायद शुरू हो गई है। पिछले कुछ समय से ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर तमाम पार्टियों में जोर अजमाइश शुरू है। कानपुर के विकास दुबे कांड और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर ब्राह्मणों में कथित नाराजगी की बातें सामने आई हैं। सपा और बसपा दोनों की नज़र राज्य में करीब 16 प्रतिशत ब्राह्मण मतादाताओं पर है। राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक कुल 80 संसदीय सीटों में से करीब 25 पर सीधे तौर पर ये मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पिछले दिनों उपजे घटनाक्रमों से चर्चा में आई ब्राह्मण वोटों की सियासत साधने में सपा भी कूद गई है। सपा के पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा ने बताया कि लखनऊ में परशुराम की 108 फीट ऊंची प्रतिमा लगाई जाएगी। साथ ही, शैक्षिक अनुसंधान केंद्र की भी स्थापना होगी। उनका कहना है कि हिन्दुत्व पर रिसर्च सेंटर और गुरुकुल भी बनाया जाएगा। प्रदेश के मेधावी गरीब बच्चों को फ्री प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी।

2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीएसपी ने अपनी पुरानी रणनीति को नए सिरे से धार देना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि साल 2007 के विधानसभा चुनाव में मायावती ने बिना गठबंधन चुनाव लड़ा था और अपने बलबूते सत्ता हासिल की थी। इसके पीछे दलितों पिछड़ों मुसलमानों के साथ सर्व समाज को जोड़ने का प्रयोग माना जाता रहा है। नई परिस्थितियों में बसपा फिर इसी सोशल इंजीनियरिंग को जमीन पर उतारने जा रही है पार्टी के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि पार्टी प्रमुख मायावती ने संगठन ढांचे में बदलाव किया है। संगठन के गठन की पहल शुरू की ऊंची जाति अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों से जुड़े प्रभावशाली लोगों को नियुक्त किया जा रहा है संख्या के हिसाब से जातिगत संयोजक बनाया जाएगा। वहीं ब्राह्मण समाज से सतीश चंद्र मिश्र लंबे समय से राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में पार्टी के नेता हैं।

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