बाबा साहेब आंबेडकर स्मारक पर सियासत तेज

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मुंबई,(ईएमएस)। हर साल की तरह इस साल भी 6 दिसंबर को डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर मुंबई के दादर स्थित चैत्यभूमि में लाखों लोग इकट्ठा हए, इसके साथ ही मुंबई में बाबासाहेब आंबेडकर के स्मारक पर राजनीति भी एक बार फिर तेज हो गई है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर बीजेपी लंदन से लेकर हिंदुस्तान तक बाबा साहेब की विरासत संजोने में जुटी है. बीजेपी का दावा है कि देश के महापुरुषों को उनकी जगह मिलनी चाहिए, लेकिन विपक्ष इस कोशिश को सियासत बता रहा है. 2014 के अपने मेनिफेस्टो में स्मारक बनाने का वादा कर चुकी बीजेपी का दावा है कि स्मारक का काम 2020 तक हो जाएगा पर सवाल यह कि जिस स्मारक की जमीन पर काम शुरू करने के लिए ही 8 साल का समय लग गया हो तो क्या स्मारक अगले 2 साल में बन पाएगा? ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि स्मारक बनने की जगह पर यानि इंदु मिल पर अब तक स्मारक के लिए एक ईंट तक नहीं रखी गई है. विपक्ष ने भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगा दिया है कि बीजेपी स्मारकों के जरिए बस महापुरुषों को अपना बताने में जुटी है, जबकि खुद उन महापुरुषों के आदर्शो पर नहीं चलती है. बाबा साहेब के पौत्र प्रकाश आंबेडकर कहते हैं कि, ‘ सरकार की नजर इंदु मिल की जमीन पर है, सरकार वहां स्मारक नहीं बनाना चाहती, इसलिए देरी की जा रही है. महाराष्ट्र सरकर दिल्ली के इशारे पर चलती है और दिल्ली कुछ और ही चाहती है, यानी केंद्र सरकार स्मारक निर्माण नहीं चाहती है.’ मालूम हो कि बाबा साहेब अंबेडकर के भव्य स्मारक के लिए वर्ष 2011 में तब की कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने इंदु मिल की जमीन देने का ऐलान किया था. फिर सरकार बदली और साल 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने इंदु मिल में स्मारक के लिए भूमिपूजन किया