ऑर्थोसोम्निया डिसऑर्डर का शिकार हो रहे लोग

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नई दिल्ली (ईएमएस)। परफेक्ट नींद चाह में अब लोग एक नए तरह की बीमारी का शिकार होते जा रहे हैं। ‘ऑर्थोसोम्निया’ नामक यह डिसऑर्डर उन लोगों को प्रभावित कर रहा है, जो अपने सोने और फिटनेस ट्रैकर्स से आने वाले रिजल्ट को लेकर ज्यादा परेशान रहते हैं। दरअसल, ऑर्थोसोम्निया में ऑर्थो का मतलब है, सीधा या करेक्ट और सोम्निया का मतलब है सोना। शोधकर्ताओं के अनुसार, ‘आजकल लोगों में स्लीप ट्रैकिंग डिवाइस को पहनकर सोने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि इससे लोगों को अपने सोने का पैटर्न जानने का मौका मिलता है। हालांकि कई ऐसे लोगों की संख्या भी बढ़ रही है, जो लोग नींद से जुड़ी समस्याओं का इलाज ढूंढ़ रहे हैं और उन्होंने यह समस्याएं स्लीप ट्रैकर की मदद से खुद ही डायग्नोज की हैं।’ दरअसल, स्लीप ट्रैकर पर भरोसा करने वाले लोगों को लगने लगता है कि वे वाकई किसी स्लीप डिसऑर्डर से ग्रस्त हैं, भले ही ऐसा कुछ न हो। इससे लोग अच्छी नींद के लिए परेशान होने लगते हैं। जानकारी के अनुसार यूएस में करीब 10 फीसदी लोग स्लीप ट्रैकर पहनते हैं, शोध में सामने आया कि यह लोग खुद से डायग्नोज की गई सोने की समस्या का इलाज ढूंढ़ते रहते हैं। सोकर उठने के बाद लोगों का शरीर कैसा महसूस कर रहा है, इस पर यकीन करने के जगह देखा गया कि मरीज स्लीप ट्रैकर पर ज्यादा भरोसा कर रहे थे कि उन्हें अच्छी नींद आई या नहीं। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, अडल्ट्स को सात से नौ घंटे की नींद की जरूरत होती है। यह अवधि हर व्यक्ति के हिसाब से अलग हो सकती है।