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पीसीआर बनी बार और वर्दी हो गई शर्मसार

सय्यद अली मेहदी (करंट क्राइम)

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। कहते है कि शौक बड़ी चीज है और अगर किसी इंसान को किसी भी चीज का कोई शौक नहीं तो उसकी जिंदगी कुछ बैरंग सी ही दिखाई देती है। कहा तो यहां तक जाता है कि शौक सिर चढ़कर बोलता है। अब खाकीधारी भी इंसान होते है और उनके भी कुछ शौक होना स्वाभाविक है। लेकिन मुसीबत तब खड़ी हो जाती है जब कुछ लोग अपने फर्ज को दरकिनार करके अपने शौक को फजीलत देते है और जमकर फजीहत उठाते है।
ऐसे ही कुछ वदीर्धारियों की पड़ताल की गई गई। जिन पर ड्यूटी के दौरान नशा करने के आरोप लगे और कुछ पुलिस वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की गई है। निश्चित रूप से ऐसे पुलिस कर्मियों के चलते बेहद अहम और भरोसेमंद विभाग को भी कलंक का दंश झेलना पड़ता है। आंकड़ों पर नजर डाले तो गत तीन वर्ष के दौरान 41 सिपाहियों, 46 होमगार्ड और 10 दरोगाओं के विरूद्ध नशे में ड्यूटी करने की जांच की गई है। जिसमें तीन होमगार्ड को बर्खास्त किया जा चुका है। जबकि एक दरोगा और आधा दर्जन सिपाहियों को भी लाइन का रास्ता दिखा दिया गया था। हालांकि कुल 96 पुलिस कर्मियों और होमगार्ड के खिलाफ गत तीन वर्ष में जांच की गई है। जिनमें अधिकतर लोगों के खिलाफ शिकायतकर्ता ने ही शपथ पत्र देखकर शिकायत वापस ले ली। जिसके बाद उक्त वदीर्धारी को दोषमुक्त कर दिया गया। विभाग में चर्चा तो यह भी है कि जिन वदीर्धारियों को दोषमुक्त कर क्लीन चिट दी गई है। उनके शौक के चर्चें तो काफी दूर तक है। लेकिन जांच में शिकायतकर्ता के शपथ पत्र ने सबसे महत्वपूर्ण रोल अदा किया और आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ मिल गया।
मामला-1
बात गत 8 फरवरी की है जब तत्कालीन एसपी सिटी सलमान ताज के कार्यालय में झंडापुर निवासी महिला शारदा ने शिकायत की कि उसके पति को कुछ पुलिसकर्मियों ने भरे बाजार में दौड़ा-दौड़ा कर पीटा है। महिला का कहना था कि उसके पति का दोष सिर्फ इतना था कि सिपाही की बाइक उसके ठेले से टकरा गई थी। आरोप था कि एक सिपाही और दो होमगार्ड बुरी तरह नशे में धुत थे। इस मामले की जांच क्षेत्राधिकारी स्तर पर की गई थी, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए पुलिस कप्तान ने सिपाही सूरजपाल सिंह को लाइन हाजिर कर दिया था। जबकि होमगार्ड अशोक और सुशील के खिलाफ कंपनी कमांडर को रिपोर्ट भेजकर उन्हें तत्काल थाने से रवाना कर दिया गया था।
मामला-2
एक मामला निवाड़ी थाना क्षेत्र में भी सामने आया था। जब एक दरोगा पर ड्यूटी के दौरान नशा करने का आरोप लगाया गया था। बात गत वर्ष 19 दिसंबर की है। जब दरोगा ओपी सिंह के खिलाफ रात्रि गश्त के दौरान नशे में होने की शिकायत की गई थी। इस मामले में जांच के दौरान सामने आया था कि दरोगा रात्रि गश्त के दौरान शराब का सेवन करते थे। यही नहीं बताया तो यहां तक जाता है कि दरोगा ने जांच के दौरान यह बात स्वीकार की थी कि सर्दी से बचने के लिए रात्रि गश्त के दौरान वह थोड़ा सा नशा कर लेते थे। इस मामले में उसके साथ अजय कुमार और शैलेंद्र चौधरी नामक दो होमगार्ड को भी सजा मिली थी। दरोगा को लाइन हाजिर किया गया था। जबकि होमगार्ड की थाने से वापसी कर दी गई थी। हालांकि पकड़े जाने के बाद होमगार्ड शैलेंद्र ने आरोप लगाया था कि सर्द रातों में सड़क पर ड्यूटी के दौरान अधिकतर पुलिसकर्मी नशे का सहारा लेते है। लेकिन चोर वही बनता है जो कि पकड़ा जाये।
मामला-3
इसी क्रम में गत 21 मार्च को भोजपुर थाने में तैनात सिपाही सतेंद्र सिंह के साथ होमगार्ड संतोष कुमार, सुंदर प्रजापति एवं लोकेश वर्मा के खिलाफ एक ट्रैक्टर चालक महेंद्र ने शिकायत की थी कि उक्त तीनों लोगों ने उससे चैकिंग के दौरान जमकर मारपीट की और 14 सौ रुपये छीन लिए। तीनों वदीर्धारी ड्यूटी के दौरान जबरदस्त नशे में थे। दूसरे दिन सुबह जब मामला मीडिया में उछला तो पुलिसकर्मी के खिलाफ जांच बैठा दी गई। जिसमें मेडिकल के आधार पर पाया गया कि तीनों ही नशे के आदी है। इस मामले में सिपाही को निलबिंत कर दिया गया था। जबकि दोनों होमगार्ड के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।

क्या पीसीआर में चल रहे थे शराब के दौर
हाल ही में पुलिस कप्तान ने कुछ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया है। सूत्रों की माने तो पुलिस कप्तान को सूचना मिली थी कि कुछ पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान मदिरा सेवन करते हैं। जिसके बाद पुलिस कप्तान ने सभी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया। हालांकि इस मामले में अधिकारिक रूप से बात ड्यूटी पर लापरवाही की की जा रही है और कोई भी पुलिस अधिकारी पीसीआर में शराब पीने की बात की पुष्टि नहीं कर रहा है। लेकिन दबी आवाज में अधिकारी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि कुछ पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान भी मदिरा सेवन करने से नहीं हिचकिचाते हैं। जिनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। गौरतलब है कि ऐसे कई मामले अक्सर ही सामने आते है जब खाकीधारी नशे की हालत में सड़कों पर झूमते और गिरते-पड़ते दिखाई देते है। निश्चित रूप से यह एक गंभीर मामला है। जिसके चलते न सिर्फ पुलिस की छवि धूमल होती है। बल्कि जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंचती है।

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