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संसद सत्र : सरकार का होगा आक्रामक विपक्ष से सामना

नई दिल्ली| संसद के गुरुवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में बिहार चुनाव के नतीजों का असर दिख सकता है। नतीजों से उत्साहित आक्रामक विपक्ष ‘असहिष्णुता’, महंगाई और विदेशी निवेश में किए गए उदारीकरण को मुद्दा बना सकता है। सरकार की कोशिश होगी कि वह इस सत्र में कई विधायी कामों को निपटा ले। इनमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को पारित कराना भी शामिल है।

बिहार में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद विपक्ष और एकजुट होकर मोदी सरकार को घेर सकता है।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने  कहा, “सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए (शीतकालीन सत्र में) अधिक दृढ़ता दिखेगी।”

सत्र 26 नवंबर को शुरू हो रहा है जिस दिन संविधान दिवस मनाया जाना है। 1949 में 26 नवंबर को संविधान के ड्राफ्ट की मंजूरी की याद में यह दिन मनाया जा रहा है। इस दिन संसद भवन परिसर को रोशनी से जगमग किया जाएगा।

सत्र के पहले दो दिन संविधान निर्माता बी.आर.अंबेडकर की 125वीं जयंती पर लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठकें होंगी। इसमें ‘संविधान के प्रति प्रतिबद्धता’ पर चर्चा होगी।

कांग्रेस नेता के.वी.थामस ने  कहा कि उनकी पार्टी सत्र में महंगाई और ‘असहिष्णुता’ का मुद्दा उठाएगी। उन्होंने कहा कि संसद में ‘टू वे ट्रैफिक’ (सरकार और विपक्ष दोनों एक-दूसरे को सुनें) को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सत्तारूढ़ गठबंधन की है।

माकपा नेता येचुरी ने कहा, “बढ़ता सांप्रदायिक ध्रुवीकरण उन बड़े मुद्दों में शामिल है जिन्हें उनकी पार्टी उठाएगी।”

माकपा नेता ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थो का दाम बढ़ाने जैसे कई ‘आर्थिक हमले’ आम लोगों पर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि माकपा बेरोजगारी, किसानों की खुदकुशी और 15 क्षेत्रों में विदेशी निवेश को दी गई छूट के मुद्दों को भी उठाएगी।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुलतान अहमद ने कहा कि बिहार चुनाव के नतीजे से संसद के अंदर और बाहर विपक्ष की एकता मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार लोकसभा में अपने ‘निर्दयी बहुमत’ का इस्तेमाल विधेयकों को पारित करने में कर रही है।

अहमद ने कहा कि संसद का सुचारु संचालन होना चाहिए क्योंकि यह लोगों के मुद्दे उठाने का मंच है।

सरकार ने विपक्ष से कहा कि वह जीएसटी जैसे मुद्दों को राजनैतिक चश्मे से न देखे। यह विधेयक राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं होने की वजह से पास नहीं हो सका है।

लेकिन, कांग्रेस का कहना है कि जीएसटी विधेयक से संबंधित उसकी ‘उपभोक्ता हितैषी’ चिंताओं का निवारण होना ही चाहिए।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शीतकालीन सत्र लाभदायक और रचनात्मक साबित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।

शीतकालीन सत्र का समापन 23 दिसंबर को होगा।

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