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कागज, कलम, दवात ला, लिख दूं विधानसभा तेरे नाम करूं

कुछ इस तरह प्रत्याशी और समर्थक दे रहे हैं दिल को तसल्ली
प्रमुख संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। 11 फरवरी को मतदान हो चुका है, जनमत ईवीएम में कैद है। नतीजा वही है जो जनता ने बटन दबाकर दे दिया है। महज 11 मार्च की गिनती ही बाकी है। लेकिन दिल है कि मानता नहीं। सब उम्मीदवार खुद को जीता हुआ मानते हैं, लेकिन यह बेकरारी क्यों हो रही है, वो मानते ही नहीं। 11 फरवरी से लेकर 11 मार्च तक के दिन उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के बीच अब गुणा-भाग वाले ही रहने वाले हैं। हर उम्मीदवार ने अपनी विधानसभा की बूथों पर पड़ी वोटों की रिपोर्ट मंगा ली है। छोटे से लेकर बड़े बूथ को टटोला जा रहा है। समर्थक कागज पैन हाथ में लिए वोटों का गुणा-भाग लगाने में जुटे हैं। उम्मीदवार को विधायक जी कहते हुए जातिवार आंकड़े बताए जा रहे हैं। भाई साहब इस बूथ पर गोयल साहब को अगर 40 प्रतिशत मुस्लिम गया है तो 60 प्रतिशत हमें भी मिला है। गर्ग साहब के खाते में बंसल साहब ने इतनी सेंध लगी दी है कि वैश्यों वाले बूथ मानों एक तरफा ही हो गए हैं। हम तो सोच रहे थे कि केके शर्मा जी कमजोर चुनाव लड़ रहे हैं। ब्राह्मण समाज ने तो लौटे में नमक डाल के उन्हें वोट की हैं, इसलिए बंसल जी आप फिकर मत करो भाजपा से ब्राह्मण छिटका मानों, बसपा जिंदाबाद है। मेयर साहब के गांव से देखना है, कितना जाट वोट हमें मिलेगा। मुरादनगर में तो मुस्लिम आधा-आधा बंट गया। दलित हमें पूरा मिलेगा और जाट 80% तो हमें ही मिला है। जीत एक तरफा आ रही है। साहिबाबाद पर जल्लू भईया ने दलित-मुस्लिम एक तरफा लिए हैं, सुनील भाई चिंता मत करों अमरपाल जी तो कहीं से कहीं तक नहीं हैं। अमरपाल भाई पूरा ब्राह्मण, मुस्लिम और बहन जी वाला दलित वोट आपने ले लिया है, जल्लू भईया और शर्मा जी आप की आंधी में उड़ चुके हैं। लोनी से मदन भईया को गुर्जर, मुस्लिम और सभी वोट मिला है। जाकिर भाई आप चिंता मत करो सब मामला हवा हवाई है। राशिद मलिक ने दौड़ खूब लगाई, मगर मुस्लिम भाई आपके थे और आपके हैं। जीत रिकार्ड तोड़ है। नंदू भईया तुमको कौन हराने वाला है। हर बूथ पर हिंदू एक जुट हैं। गुर्जर समाज तो मानो तुम्हारे लिए एक तरफा हो गया। यह सब वह बाते हैं, जो इन दिनों प्रत्याशी के कानों में उनके समर्थक भर रहे हैं। हर पल, घंटा पहर, दोपहर, शाम, सुबह सभी प्रत्याशी वोटो के गणित में जीत रहे हैं। अब 11 मार्च की तारीख दूर है, तो यह आंकड़े बाजी दिल बहलाने के लिए ख्याल अच्छा है। वैसे जीत-हार ईवीएम में कैद हो चुकी है। गुणा-भाग कितने ही लगाए जाएं, जो होना था वो तो ही गया है। कागज-कलम दवातला लिख दूं विधानसभा तेरे नाम करूं। 11 मार्च जब आएगी, तब देखी जाएगी। तब तक तो खुश हो ही लो।

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