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अमेजन खुलासे पर पांचजन्य को मिला आरएसएस का साथ, सरकार से की जांच कराने की मांग

नई दिल्ली। अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी अमेजन पर पांचजन्य द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीर बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग सरकार से की है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए संघ के एक नेता ने कहा कि पांचजन्य की कवर स्टोरी में अमेजन पर जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं, वो काफी गंभीर है और इस सरकार को इस मामले की जांच करानी चाहिए।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए संघ मामलों के जानकार राजीव तुली ने कहा कि पांचजन्य की यह रिपोर्ट इंटरनल व्हिसिल ब्लोअर द्वारा किए गए खुलासे पर आधारित है, इसलिए इसकी समुचित जांच कराना जरूरी है। राजीव तुली ने कहा कि इतनी बड़ी राशि केवल वकीलों पर या कंसलटेंसी के नाम पर खर्च करना कितना ठीक है, यह जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि अमेजन की वजह से छोटे व्यापारियों पर क्या असर पड़ा है, इसकी भी जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही राजीव तुली ने इस पूरे मामले में अमेजन से भी अपना पक्ष रखने की मांग की।
आपको बता दें कि पांचजन्य ने इससे पहले आईटी कंपनी इंफोसिस पर भी एक कवर स्टोरी में कई तरह के आरोप लगाए थे। आईएएनएस ने इस पूरे मामले पर पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर से भी बातचीत की।
आईएएनएस से बातचीत करते हुए पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कहा अमेजन कंपनी के ही एक मुखबिर ने यह खुलासा किया है कि कंपनी ने सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए एक बड़ी राशि का इस्तेमाल किया है। यह सवाल अमेजन से पूछा जाना चाहिए कि आखिर वो क्या गलत काम करता है, जो उसे रिश्वत देने की जरूरत पड़ती है।
उन्होंने कहा कि अमेजन भारत के बाजार पर कब्जा करना चाहती है, अर्थव्यवस्था पर कब्जा करना चाहती है भारतीय संस्कृति पर भी आघात कर रही है , इसी तरह का काम तो ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी किया था।
पांचजन्य संपादक ने कहा कि यह कंपनी नीतियों तक को प्रभावित करने का कार्य करती है, नार्वे जैसे देश के बराबर यह पर्यावरण को प्रदूषित करती है।
इंफोसिस पर पांचजन्य द्वारा हाल ही में की गई स्टोरी पर आरएसएस और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रतिक्रिया पर आईएएनएस द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में हितेश शंकर ने कहा कि यह धारणा गलत है कि पांचजन्य संघ का मुखपत्र है। उन्होंने साफ किया कि पांचजन्य संघ का मुखपत्र नहीं है , यह पांचजन्य की स्टोरी थी और हम अपनी स्टोरी पर आज भी कायम है। जहां तक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रतिक्रिया का सवाल है , उन्होंने भी माना है कि ये खामियां हैं। हां, ये हो सकता है भाषा तीखी लगी हो या शैली से असहमति हो लेकिन पांचजन्य के तथ्यों से किसी को असहमति नहीं है।
अमेजन पर लिखी गई स्टोरी की जांच के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में पांचजन्य संपादक ने कहा कि कई व्यापारी समुदाय ने अपने पत्रों में इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।संघ परिवार से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह- संयोजक अश्वनी महाजन ने पांचजन्य के खुलासे पर आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि स्वदेशी जागरण मंच 2015 से ही अमेजन के बारे में आवाज उठाता रहा है कि यह कंपनी गैरकानूनी तरीके से चोर दरवाजे से रिटेलिंग कर रही है।
आईएएनएस से बातचीत करते हुए अश्वनी महाजन ने कहा कि अमेजन गैरकानूनी रूप से काम करने के लिए भ्रष्टाचार और रिश्वत का सहारा ले रही है। यह हमारे देश के अर्थतंत्र पर कब्जा करना चाहती है और इसलिए इसे ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0 कहना बिल्कुल सही है।

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