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ग़ाजियाबाद

गांव को लेकर पंचायत अध्यक्ष पति का सधा हुआ दांव, कहा मैं 10 गांव के साथ और मेरे साथ गांव

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। नगर पालिका में शामिल होने और ना होने को लेकर लोनी की गांव सियासत में इस समय बूम चल रहा है। 10 गांव को नगर पालिका में शामिल किया जाना है और गांव वाले शामिल नहीं होना चाहते। विधायक नन्दकिशोर गुर्जर गांव वालों को तंज वाले लहजे में कह चुके हैं कि यदि तुम्हें विकास नहीं चाहिए तो मुझे लिखकर दे दो मैं सरकार से कहकर गांव का नाम एग्जिट लिस्ट में रखवा दूंगा। पूर्व विधायक अलग मोर्चा खोल चुके हैं और स्टोरी में ट्वीस्ट टीलाशहबाजपुर की बैठक से आ गया है। टीला शहबाजपुर में एक बैठक हुई और यह बैठक गांव को नगर पालिका में शामिल किए जाने के विरोध में थी। इस बैठक में लगभग 200 से ज्यादा लोग शामिल हुए। बड़ी बात ये रही कि फैसला का विरोध कर रही इस बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष पति पवन मावी भी शामिल हुए। पवन मावी लोनी की सियासत के गेम चेंजर माने जाते हैं। सूबे में सरकार आने के बाद वो दिल्ली से मेम्बर बने और गाजियाबाद की सियासत को हिला दिया। बेहद नाटकीय ढंग से उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष वाला गेम अपने पक्ष में कर लिया। उनकी पत्नी लक्ष्मी मावी जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। इस गेम में उनके साथ सारथी की भूमिका में लोनी विधायक नन्दकिशोर गुर्जर रहे थे।
अब जब पवन मावी इस पंचायत में पहुंचे तो यह संदेश था कि मोर्चा उस ओर से खुला है जो कभी विधायक नन्दकिशोर के पक्ष में थे। पंचायत चुनाव में पवन मावी के साथ नन्दकिशोर गुर्जर पूरी तरह साथ लगे थे। ये गेम पवन मावी ने तब जीता था जब कोई मानकर नहीं चल रहा था कि पवन मावी इस गेम को जीतेंगे। बहरहाल विधायक नन्दकिशोर गुर्जर पहले ही गांव वालों से कह चुके हैं कि जिन लोगों की विकास वाली सोच नहीं है वह लिखकर दे दें। मगर टीला मीटिंग तो कुछ और ही एहसास करा रही है।
करंट क्राइम ने जब इस मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष पवन मावी से बात की तो उन्होंने कहा कि मैं इस बैठक में शामिल हुआ हूं। मैं गांव वालों के साथ हूं और यदि वो विरोध कर रहे हैं तो फिर उन्हें क्यों शामिल किया जा रहा है। पवन मावी ने कहा कि मैं स्पष्ट कर चुका हूं कि मैं हर मामले में विधायक नन्दकिशोर गुर्जर के साथ हूं लेकिन इस मामले में उनके साथ नहीं हूं। मैं भी विकास चाहता हूं और नगर पालिका में गांवों को शामिल किए जाने से विकास रूकेगा। जब पंचायत गांव को शामिल किए जाने के विरोध में हुई है तो मैं गांव वालों के साथ हूं और गांव वाले मेरे साथ हैं। अगर गांव वाले विरोध कर रहे हैं तो फिर मेरा भी पूरी तरह से विरोध है।

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