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हिण्डन मोक्ष स्थली पर गुरूवार को हो गई डेढ़ दर्जन अर्थियां रिटर्न

लोगों को मजबूर होकर करना पड़ा दूसरी जगह दाह संस्कार
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। हिण्डन मोक्ष स्थली पर गुरूवार को अजीब ही नजारा था। यहां सुबह जब मोक्ष स्थल पर दाह संस्कार का काम शुरू हुआ तो थोड़ी देर में ही हाउसफुल का बोर्ड लग गया। कहावत ये है कि शमशान से मुर्दे कभी वापिस नहीं जाते और गुरूवार को हिण्डन शमशान घाट पर कहावत उलटी हो गयी और मुर्दों को दाह संस्कार के लिए लेकर आये परिजन यहां परेशान होते रहे और फिर पार्थिव शरीर के दाह संस्कार की व्यवस्था किसी ने इन्दिरापुरम में की तो कोई मेरठ रोड पर बने शमशान घाट में पहुंचा। कई लोग अपने दिवंगत के पार्थिव शरीर को ब्रजघाट ले गये। ऐसा क्या हुआ कि गुरूवार को शमशान घाट पर दाह संस्कार के लिए जाम लग गया।

बताया ये जाता है कि इसके पीछे बड़ा कारण गुरूवार होना भी रहा। गुरूवार को आमतौर पर अस्थियां प्रवाहित नहीं की जाती हैं लिहाजा जिन लोगों के दिवंगत परिजनों का दाह संस्कार बुधवार को हुआ था। उनकी चिताओं से भी फूल नही चुगे गये थे। लोग परेशान थे कि अब पार्थिव शरीर लेकर शमशान घाट आ गये हैं तो यहां से कहां जायें। शमशान घाट वालों ने गेट बंद कर दिए थे कि अब और जगह नहीं है। बताते हैं कि गुरूवार को डेढ दर्जन से ज्यादा अर्थियां हिण्डन शमशान घाट से इसलिए वापिस हुई क्योंकि यहां दाह संंस्कार के लिए स्थान नहीं था।

जब मंत्री प्रतिनिधि ने कराया डीएम को इस समस्या से अवगत
गर्मी का मौसम था और लॉक डाउन एडवाईजरी का पालन करते हुए लोग दुख की घड़ी में जब अपने दिवंगत परिजन की अर्थी लेकर पहुंचे तो वह यह देखकर हैरान रह गये कि शमशान घाट पर जगह नहीं है और उन्हें कह दिया गया कि आप कहीं और जाकर दाह संस्कार कर लो। लोग परेशान हो रहे थे और कोई सुनने वाला नहीं था। छपरौला बिसरख रोड की रहने वाली बुजुर्ग महिला लखपति देवी का निधन हो गया था। जब शव वाहन से उनके परिजन शव लेकर दाह संस्कार के लिए पहुंचे तो उन्हें स्पष्ट मना कर दिया गया।
इसके अलावा कल्लू पुरा के एक व्यक्ति का निधन होने पर जब उसके परिजन भी पहुंचे तो उन्हें भी इंकार कर दिया गया। लोगों ने जब राज्यमंत्री अतुल गर्ग के प्रतिनिधि राजेन्द्र मित्तल मेंदी वाले को फोन मिलाया तो उन्होंने लोगों की परेशानी को समझा और तुंरत ही इस पूरे मामले से डीएम को अवगत कराया। इसके बाद लोगों को इन्दिरापुरम और अन्य शमशान घाट पर अपने दिवंगत की अर्थी का दाह संस्कार करने के लिए भेजा गया।

जब निगम ने चालू कर दिया फिर क्यों बंद था  विद्युत शवदाह गृह
गुरूवार को हिण्डन शमशान घाट पर लोग अपने दिवंगत परिजनों के पार्थिव शरीर का दाह संस्कार करने के लिए परेशान हो रहे थे और यहां पर सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जिस विद्युत शवदाह गृह को कोरोना मृतकों के दाह संस्कार के लिए चालू करने का दावा किया गया था वह पूरी तरह झूठा निकला। लोग परेशान हो रहे थे और विद्युत शवदाह गृह बंद था। उसे आॅपरेट करने के लिए यहां कोई भी व्यक्ति नहीं था।
यदि विद्युत शवदाह गृह चालू अवस्था में होता तो कुछ मृतकों का दाह संस्कार यहां हो सकता था। कहने वालों ने कहा भी कि जब निगम ने इसका बटन दबा दिया तो फिर यह चल क्यों नहीं रहा है। खास बात यह है कि जीडीए ने दो करोड़ की लागत से इस विद्युत शवदाह गृह का निर्माण कर इसे नगर निगम को सौंपा है।
यदि दो करोड़ खर्च करने के बाद भी लोगों को दाह संस्कार के लिए भी परेशान होना है तो फिर सरकार एक्शन ले। बेहतर होगा कि इस विद्युत शवदाह गृह का संचालन किसी एनजीओ को दे दिया जाये। तब यहां जनता को परेशानी भी नहीं होगी और बेहद कम दामों पर दाह संस्कार हो सकता है।

जब उठी निगम के पांच जोन में शमशान घाट की मांग
गुरूवार को जब हिण्डन शमशान घाट पर हाउसफुल का बोर्ड लग गया और यहां लोगों को बेहद परेशानी उठानी पड़ी तब फोन मंत्री प्रतिनिधि से लेकर पार्षदों तक पहुंचे। फोन निगम के बड़े अधिकारियों के पास भी गये और प्रशासन के बड़े अधिकारियों के पास भी यह सूचना थी। किसी तरह शमशान घाट की व्यवस्था संभाल रहे प्रिंस ने इन्दिरापुरम शमशान घाट पर दाह संस्कार की व्यवस्था करवाई। लेकिन सवाल उठ गया कि यह नौबत आई क्यों है। ऐसी स्थिति तो लॉक डाउन में तब नहीं आई जब महामारी फैली हुई थी। अब भाजपा के पार्षदों ने यह बात कही है कि निगम के सभी जोनों में निगम द्वारा एक शमशान घाट स्थापित कराया जाना चाहिए। निगम इन शमशान घाटों की पूरी व्यवस्था को अपने हाथ में ले जिससे कोई पब्लिक का आर्थिक दोहन ना कर सके। उसे बाजार रेट से दुगुनी रेट में लकड़ी ना बेच सके और यहां पर एक परिवार की मल्कियत भी खत्म होनी चाहिए।

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