फिर शुरू हुआ मोदीनगर पालिका में शिकायतों का दौर

0
7

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। मोदीनगर की नगर पालिका को नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष और यहां तैनात अधिशासी अधिकारी के बीच विवाद के लिए जाना जाता है। सरकार किसी की भी हो लेकिन विवाद जारी रहता है। पूर्व में जब सरोज शर्मा पालिका अध्यक्ष थीं तो यहां उनका विवाद कई बार सुर्खियों में रहा। अब जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, केंद्र में भाजपा की सरकार है और मोदीनगर में नगर पालिका परिषद अध्यक्ष भाजपा के हैं, तब भी विवाद जारी है। मामला नगर विकास मंत्री तक पहुंचा है और शिकायत भी नगर पालिका परिषद अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी ने की है।
बताते हैं कि मामला वर्ष 2016 से जुड़ा है। नगर पालिका परिषद में तैनात रहे अधिशासी अधिकारी आरके प्रसाद का तबादला 18 नवंबर 2016 को कर दिया गया था। इसके बावजूद आरके प्रसाद ने सरकारी आवास खाली नहीं किया। अब नगर पालिका चेयरमैन अशोक माहेश्वरी ने नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को पत्र लिखकर शिकायत की है। अशोक माहेश्वरी की शिकायत को भी एक महीना हो गया लेकिन आवास पर कब्जा अब भी बरकरार है। अशोक माहेश्वरी ने 6 जनवरी को नगर विकास मंत्री को शिकायत की थी। उन्होंने अपनी शिकायत में सीधे-सीधे आरोप लगाया था कि अधिशासी अधिकारी आरके प्रसाद द्वारा अब तक सरकारी आवास पर कब्जा किया हुआ है, जबकि उनका तबादला हापुड़ जिले की नगर पालिका परिषद पिलखुवा में हो चुका है।
अशोक माहेश्वरी ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा भी कई शिकायती पत्र शासन को भेजे गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्होंने तत्कालीन अधिशासी अधिकारी आरके प्रसाद से सरकारी आवास को कब्जा मुक्त कराने के लिए पत्र लिखा है।
सरकारी फाइलें भी अधिशासी अधिकारी के कब्जे में
एक माहौल बन रहा है कि भाजपा सरकार में अधिकारी ही सरकार को चला रहे हंै। इस आरोप को अब बल भी भाजपा के टिकट पर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष का चुनाव जीते अशोक माहेश्वरी के पत्र से मिल रहा है। मामला गंभीर है और बड़ी बात यह है कि सरकार बदलने के बाद भी अधिकारी नहीं बदले हैं। अशोक माहेश्वरी ने जो पत्र नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को लिखा है, उसमें उन्होंने लिखा है कि नगर पालिका के महत्वपूर्ण अभिलेख, सरकारी फाइलें और निर्माण कार्यों से संबंधित फाइलें अब भी तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के कब्जे में हैं। उन्होंने लिखा है कि तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के खिलाफ कई शिकायत पत्र भेजने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पालिका से जुड़ी कई सरकारी फाइलें आरके प्रसाद द्वारा पालिका में उपलब्ध नहीं कराई गर्इं हैं। पालिका अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी ने नगर विकास मंत्री से अनुरोध किया है कि पालिका की महत्वपूर्ण फाइलें और निर्माण संबंधित फाइलें तत्कालीन अधिशासी अधिकारी आरके प्रसाद से दिलवाई जाएं। अब इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि सरकार में रहते हुए नगर पालिका के अध्यक्ष अपनी ही सरकार के मंत्री से एक अधिकारी के खिलाफ फाइलें वापस दिलवाने की गुहार लगा रहे हंै। अधिकारी का तबादला भी हुआ तो 30 किमी की रेंज में। सरकार बदल गई लेकिन न अधिकारी ने सरकारी आवास बदला और न ही फाइल दबाने का अंदाज बदला।