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15 जुलाई को न हो जाए राम वालों में महाभारत!

11 हजार वालों को न्यौता और एक हजार वाले पहुंचेंगे खुद
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। सुल्लामल रामलीला कमेटी में बाड़ा और अखाड़ा ऐसे ही नहीं रखा गया है। इस कमेटी का इतिहास रहा है कि यहां रामलीला से पहले एक बार किसी न किसी बात को लेकर महाभारत जरूर होती है। कुछ दिन पहले सदस्यों को लेकर कमेटी में विवाद हुआ था। इस विवाद के बाद लगभग दो सौ से ज्यादा सदस्य बढ़ गए हैं। सौ सदस्य वह हैं जिन्होंने एक हजार एक रुपये की रकम बैंक में कमेटी के खाते में जमा करा दी है। वहीं दूसरी तरफ सौ से ज्यादा वह आजीवन सदस्य हैं जिनसे कमेटी ने ग्यारह हजार रुपये लेकर उन्हें सदस्यता प्रदान की है।
अब सवाल इस बात को लेकर खड़ा हो गया है कि रामलीला कमेटी ने 15 जुलाई को जो आम बैठक बुलाई है उसमें कौन-कौन शामिल हो सकता है। कमेटी के महामंत्री वीनू बाबा पहले ही कह चुके हैं कि बैठक का न्यौता केवल रजिस्ट्रार कार्यालय व कोर्ट से निर्धारित सूची के अनुसार ही 330 सदस्यों को भेजा गया है। वीनू बाबा पहले ही कह चुके हैं कि यदि आम बैठक में इसके अलावा अन्य लोग खुद को सदस्य बताते हुए आते हैं तो फिर उन्हें बाहर कर दिया जाएगा और ऐसे में हम पुलिस बुलाकर कार्रवाई करेंगे। सूत्र बता रहे हैं कि रामलीला कमेटी में महाभारत के आसार बन गए हैं। बताया जा रहा है कि ग्यारह हजार रुपये के आजीवन सदस्यों को भी बैठक में बुलाया गया है। ग्यारह हजार रुपये देकर आजीवन सदस्य बने कई सदस्यों ने इसकी पुष्टि की है। किसी ने बताया कि उनके पास विधिवत निमंत्रण आ चुका है तो कई ऐसे सदस्यों को पदाधिकारियों के भाई और पुत्रों ने ही अपनी तरफ से निमंत्रण दे दिया।
अब एक हजार एक वाली लिस्ट के लोग भी तैयार हो गए हैं। उनका कहना है कि हम बैठक में ही इस बात को रखेंगे कि जब हम कमेटी संविधान के अनुसार शुल्क जमा करा चुके हैं तो फिर हमें सदस्य किस आधार पर कमेटी नहीं मान रही है। इन सदस्यों का कहना है कि केवल चार चेहरे मिलकर पूरे शहर की कमेटी का फैसला नहीं कर सकते। यदि ऐसा हुआ तो हम विरोध करेंगे। बताया जा रहा है कि आम बैठक को भी सस्पेंस मूवी बना दिया गया है। यदि कमेटी अपने सदस्यों को बुला रही है तो फिर उसे सबको बुलाना चाहिए और यदि एक हजार एक रुपये वाले अलाउड नहीं है तो फिर कमेटी ने ग्यारह हजार वालों को किस आधार पर न्यौता दे दिया है। वहीं कमेटी सूत्र बता रहे हैं कि जिन लोगों को आजीवन सदस्य बनाया गया है, उन्हें कमेटी संविधान के अनुसार ही बनाया गया है। इसलिए आजीवन सदस्य बैठक में बुलाए जा सकते हैं। एक हजार एक वाले लोग यह तो बताएं कि उन्होंने किसके कहने पर कमेटी के खाते में पैसे जमा करा दिए और केवल पैसे जमा कराने से कोई सदस्य नहीं बन जाता है। सदस्य बनने के लिए बाकायदा सदस्यता पर्ची कटती है और सदस्यता पर्ची काटने का अधिकार ही कमेटी को है।
बहरहाल अब प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। यहां पहले से ही मूर्ति को लेकर विवाद की स्थिति चल रही है और कोई ताजुब नहीं होगा जब 15 जुलाई की बैठक में हंगामा हो जाए।

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