भगवान राम को लेकर अब वोट बैंक की राजनीति कारगर नहीं रही : बाबा रामदेव

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हरिद्वार (ईएमएस)। योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि राजनीति मेरा स्वभाव नहीं है। मेरा मूल धर्म योग, सेवा, राष्ट्र में है। इसलिए अब किसी दल का प्रचार नहीं करूंगा। रामदेव का कहना है कि वोट, राजनीति और राम तीनों अलग हैं। एक समय ऐसा भी था जब राम वोट बैंक बन गए थे। अब परिस्थितियां बदल गई हैं। आस्था से जुड़े भगवान राम को लेकर अब वोट बैंक की राजनीति कारगर नहीं रही। अब परिभाषा बदल रही है। जब तक राम राजनीति और अदालत में रहेंगे, बात नहीं बनेगी। राम का मंदिर और चरित्र में भारत का स्वभाव-संस्कृति है। इसी रूप में मामले को देखकर हल निकाला जा सकता है।
शनिवार को पतंजलि योगपीठ में अपने आवास पर बाबा रामदेव ने एक बातचीत में यह बातें कहीं। बाबा रामदेव ने कहा कि श्रीराम सभी को न्याय दिलाते हैं। ऐसे में राम को अदालत में क्यों घसीटें? राम को अदालत में खड़ा कर दिया गया है। इसके लिए राजनीति दोषी है। मंदिर निर्माण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अध्यादेश न लाने संबंधी बयान पर बाबा रामदेव ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में राम मंदिर फिट नहीं बैठ रहा है। लोग ओबीसी, मुस्लिम, दलित और सवर्ण कबीले में बंटे हुए हैं। इन चार कबीलों के कोलाहल में रामधुन कुंद हो गई है। यही कारण है कि नरेंद्र मोदी मंदिर मामले में संयम बरत रहे हैं। मोदी विकास, सामाजिक, न्याय के एजेंडे पर अगला लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। मोदी का पूरा फोकस समृद्ध भारत के निर्माण पर है। राम का चरित्र भी यही है कि रामराज्य में कोई दरिद्र न हो, किसी के साथ अन्याय न हो। ऐसे ही एक श्रेष्ठ राष्ट्र की कल्पना नरेंद्र मोदी ने की है।
वैदिक शिक्षा बोर्ड पर जोर देते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि लोकतंत्र में किसी को जबरन किसी बोर्ड से पढ़ने को बाध्य नहीं किया जा सकता है। हम आधुनिक शिक्षा के साथ वेद, दर्शन, उपनिषद पढ़ना चाहते हैं। यह मौलिक संवैधानिक अधिकार है। केंद्र सरकार शिक्षा के भारतीयकरण का क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सरकार की प्रतिबद्धता से आशान्वित भी हूं। बाबा ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में देश में राजनीतिक संकट था। तब मैंने राष्ट्रधर्म निभाया था। राजनीति मेरा स्वभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि पतंजलि योगपीठ के ढाई दशक के सफर में हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही एफएमसीजी के क्षेत्र में योग, आयुर्वेद, आध्यात्म, स्वदेशी आज एक ब्रांड बन चुके हैं।