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डेढ़ साल से इस थाने में नहीं दर्ज हुई कोई एफआईआर

सय्यद अली मेहदी (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। थाने इसलिए बनाए जाते हैं कि पुलिस अपराधियों की पकड़-धकड़ करें और उनके खिलाफ मुकदमा यानी एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को अदालत में पेश करें। जनपद में कुल 16 थाने हैं। जिसमें औसतन प्रतिदिन 30 से 50 के बीच एफआईआर दर्ज होती है। लेकिन इन्हीं थानों के बीच एक ऐसा थाना भी है। जिसमें उसके स्थापना दिवस से आज तक यानी लगभग डेढ़ साल के अरसे में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। ना तो थाने में स्टाफ है और ना ही कोई रजिस्टर चिट्ठी-पत्री टेबल आदि सामान है। बस थाने का एक कमरा है और एक थानेदार है। महत्वपूर्ण बात यह है कि शासन ने जिस मकसद के साथ इस थाने को शुरू कराया था। वह मकसद बेहद महत्वपूर्ण है। हम बात कर रहे हैं थाना सिहानी गेट प्रांगण में स्थित बाल मित्र पुलिस थाने की। लेकिन शासन की जनकल्याण वाले फैसले को हमारी पुलिस ने धरातल पर ला दिया। गत डेढ़ साल में बाल मित्र पुलिस थाने का कोई उपयोग नहीं हुआ है।
चिराग तले अंधेरा वाली कहावत चरितार्थ
चिराग तले अंधेरा वाली कहावत थाना सिहानी गेट और बाल मित्र पुलिस थाने के मामले में साबित होती है। क्योंकि आंकड़ों के मुताबिक गत 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2017 तक के बीच थाना सिहानी गेट में बाल अपराध से संबंधित 29 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जबकि उसी प्रांगण में बाल अपराध की रोकधाम और काउंसलिंग के लिए बनाए गए बाल मित्र पुलिस थाने में एक भी मामला नहीं पहुंचा। ऐसे में इसे पुलिस की उदासीनता ही कहा जाएगा। जो किसका शासन द्वारा चलाई गई कल्याणकारी योजना पर पलीता कर रहे हैं।
बाल मित्र पुलिस थाने
का उद्देश्य
शासन ने प्रदेश में बढ़ रहे बाल अपराधों को अति गंभीरता से लेते हुए निर्णय किया था। कि बाल अपराधियों को सिर्फ जुवेनाइल मुकदमे का सामना ही नहीं करना पड़ेगा। बल्कि उन्हें थाने स्तर पर ही काउंसलिंग मुहैया कराई जाए । जिससे उनके कच्चे मन को वापसी का रास्ता दिखाई देने लगे । ऐसा ना हो कि एक बार किशोरावस्था में अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद वह उस दलदल से वापस ना आ सके। ऐसे में प्रदेश भर में फरवरी 2016 बाल मित्र पुलिस थानों की स्थापना की गई थी। जो कि प्रत्येक जिले में एक थाने के प्रांगण में बनाया गया था। इसके लिए एक प्रभारी नियुक्त किया गया था। जो कि बाल अपराध संबंधित मामलों की विवेचना काउंसलिंग एवं उनसे जुड़ी अन्य बातों की जिम्मेदारी संभाल लेगा।

डेढ़ साल में एक भी मामला नहीं आया: अक्षया चौधरी
इस संबंध में बाल मित्र पुलिस थाना प्रभारी अक्षया चौधरी का कहना है कि गत डेढ़ साल से हुए बाल मित्र थाना पुलिस का प्रभाव संभाले हुए हैं। लेकिन इस दौरान एक भी मामला नहीं आया। ऐसे में कोई मुकदमा, काउंसलिंग आदि का सवाल ही नहीं उठता। वह प्रतिदिन थाने आती हैं। लेकिन उनकी मूल तैनाती थाना सिहानी गेट में दरोगा के तौर पर है। ऐसे में वे अपनी मूल तैनाती का कार्य तो रोज करती है। लेकिन बाल मित्र पुलिस थाने का कोई कार्य न होने के चलते वह सिर्फ अब तक नाम मात्र की थाना प्रभारी नहीं है।

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