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सम्पादकीय

नववर्ष में पेश करें देश की नई तस्वीर

फिर से एक साल गया और दूसरा साल आ गया। हर साल हम कुछ नया करने का सकंल्प लेते हैं। इन संकल्पों पर कईं बार विकल्प हावी हो जाते हैं। इस वर्ष को भी कई उपलिब्धियों के लिये याद रखा जायेगा। मोदी लहर को दिल्ली वालों ने ऐसा झटका दिया कि पूरा विपक्ष तीन पर सिमट गया। बिहार मे गठबंधन का जलवा सरकार ले आया। कईं वादे सरकारों ने किये। कुछ पूरे हुये तो कुछ जुमले रह गये। इस साल देश ने आतंकवाद के खिलाफ जो एकजुटता दिखाई वह वाकई काबिले तारीफ है। इसी साल एक आतंकी को फांसी के फंदे पर लटकाया गया तो, आतंकी और मीडिया की भाषा मे अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद की कार को नीलामी में खरीद कर उसे आग लगा दी गई। देश में पक्ष और विपक्ष ने आतंक के मुददे पर एकजुट दिखाई दिया। भारतीय कूटनीती की सराहना हुई। उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कदम सरकार ने उठाए, तो गरीबों के लिये आवास मुहैया कराने की कोशिशे भी रगं ले आई। देश की राजधानी दिल्ली में जिस तरह से आम आदमी पार्टी की सरकार ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिये आॅड ईवन का फार्मूला निकाला उसकी तारीफ होनी चाहिये। प्रदूषण की समस्या हो या आतंकवाद की जब तक पूरा देश एकजुट नहीं होगा तब तक किसी समस्या पर काबू नहीं पाया जा सकता है। इस साल कईं बड़ी हस्तियां भी हम से जुदा हो गई। हर साल कई उपलिब्धयां खाते में होती हैं तो कईं गलतियां भी हमारे हिस्से में आती हैं। बीते वर्ष की गलतियों से सबक लेकर इस वर्ष देश को मजबूत करने का संकल्प लें। देशभक्ति की परिभाषा में केवल देश की सीमा पर जाकर देश के दुश्मनों से लड़ना ही शामिल नहीं हैं। देशभक्ति का मतलब देश के भीतर मौजूद देश के दुश्मनों से लड़ने का काम भी है। देश के दुश्मन वो भी हैं जो देश में प्रदूषण की मात्रा को खतरनाक स्तर तक ले जा रहे हैं। इससे मौत की गर्त में पूरा देश ही जा रहा है। देश के दुश्मन वो भी हैं जो दवा से लेकर अनाज तक नकली बेच रहे हैं। देश के दुश्मन वो भी हैं जो नदी से लेकर जगंल को खत्म करने पर लगे हैं। जीवन का मतबल जीव और वन से है। आओ 2016 में ये सकंल्प लें कि हम अपने हिस्से की नदी को साफ रखेंगें। हम देशभक्ति का जज्बा अपने हिस्से के कचरे को साफ कर भी दिखा सकते हैं। किसी भी हालत में देश से गद्दारी नहीं करेगें। अपने हिस्से के वातावरण को प्रदूषण से बचायेंगे। जब देश का हर नागरिक छोटी छोटी बातों से देश को महान बनने में योगदान देगा तो हमें विश्व की ताकत बनने से कोई नहीं रोक सकता। इस साल लोकतंत्र के मदिंर कहे जाने वाले संसद में जिस तरह से सत्र का समय नष्ट हुआ उससे आने वाले साल में सीख लेते हुये काम करेंगे। साल दर साल जनसंख्या का बोझ देश के  लिये एक अभिशाप बन रहा है। हम अपने पड़ोसी देश चीन से ही सबक सीख सकते हैं। आतंकवाद के खिलाफ लडेंÞगे तो सामाजिक समरसता के अपने सस्ंकार को मजबूत करने का काम भी करेंगे। नववर्ष का एक-एक पल हर नागरिक के लिए मंगलमय रहे यही कामना करता हूं। करंट क्रांइम परिवार को जो स्नेह एवं मार्ग-दर्शन आपने 2015 में दिया, वह 2016 में भी मिलता रहे, इसी आशा और विश्वास के साथ आप सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं। – मनोज गुप्ता

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