नेपाल के बैंकों में अब भी 7 करोड़ के पुराने भारतीय नोट, भारत से कोई जवाब नहीं मिला: ग्यावली

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नई ‎दिल्ली (ईएमएस)। भारत दौरे पर आए नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने भारत को एक महत्वपूर्ण कारोबारी साझेदार और भरोसेमंद दोस्त बताया है। ग्यावली ने कहा कि नेपाल के लिए भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का भी एक बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि नेपाल के बैंकों और आम जनता के पास अब भी बड़ी मात्रा में पुरानी प्रतिबंधित भारतीय करेंसी है ‎जिसे लेकर भारत सरकार से बात चल रही है, लेकिन अभी कोई आश्वासन नहीं मिला है।
ग्यावली रायसीना डायलॉग में शि‍रकत करने भारत आए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने इस संवाद का आयोजन किया है। ग्यावली ने कहा, ‘ हमने भारत से इस करंसी के मसले को सुलझाने को कहा है. हम यह आवश्वासन चाहते हैं कि आगे जब भी कोई नया नोट आता है, तो ऐसी कोई समस्या न आए। ऐसे करीब सात करोड़ रुपये मूल्य के भारतीय नोट नेपाल के बैंकिंग सिस्टम में हैं, लेकिन अभी इस बात का अंदाजा नहीं है ‎‎कि जनता के पास ऐसे कितने नोट हैं। हम चाहते हैं कि इन सभी पुराने नोटों की जगह नई भारतीय करेंसी मिले। हमने इसकी चर्चा की है, लेकिन इस पर भारत सरकार से अभी कोई जवाब नहीं मिला है।
वहीं द्‍वि‍पक्षीय रिश्तों को लेकर उन्होंने कहा कि काफी समस्या हमें विरासत में मिली है। लंबे अरसे से चले आ रहे लंबित मसलों को रातोरात हल नहीं किया जा सकता। लेकिन हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और गरीबी से अकेले नहीं लड़ा जा सकता। इसके लिए सार्क देशों को ‎मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद हमने सबसे पहले पड़ोसी नीति पर ध्यान दिया और इसमें भारत का प्रमुख स्थान है। जब पिछले साल नेपाल के पीएम भारत आए थे तो उन्होंने कई नए आयामों पर जोर दिया था। भरोसा बनाने, मौजूदा प्रोजेक्ट्स को लागू करने और सीमा पार रेलवे और आंतरिक जल मार्ग जैसे आर्थिक सहयोग बढ़ाने, कृषि और ऑर्गनिक खेती जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
ग्यावली ने कहा, ‘ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में हम एनर्जी बैंकिंग मॉडल का इस्तेमाल कर सकते हैं। हमें जाड़े के दौरान ज्यादा बिजली चाहिए। आज भी पनबिजली पर निर्भर हैं, इसलिए जाड़े में हमारे पास सरप्लस नहीं होता। मानसून में हमारे पास सरप्लस होता है और उस दौरान भारत को अतिरिक्त बिजली चाहिए होती है। इसलिए हम इसके लिए व्यवस्था कर सकते हैं। ‘ उन्होंने कहा कि नेपाल एक ट्रांजिट देश नहीं है और ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने के लिए अब इनलैंड वाटरवेज पर जोर दिया जा रहा है ताकि मार्केटिंग की लागत कम की जा सके। बनारस तक गंगा जल प्रणाली से जुड़ने वाली नेपाली नदियों का इस्तेमाल इसके लिए किया जा सकता है। पंचेश्वर परियोजना के बारे में कहा कि इसके लिए 23 साल से इंतजार हो रहा है। हम चाहते हैं कि सभी लंबित मसलों का निपटारा हो और बिजली सहयोग मामले की एक नए ‎सिरे से शुरुआत हो।