5 ट्रिलियन अ‍र्थव्‍यवस्‍था के लिए टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करने की जरूरत: मंत्री धर्मेंद्र

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नई दिल्ली (ईएमएस)। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज कहा कि 5 ट्रिलियन अ‍र्थव्‍यवस्‍था को गति प्रदान करने के लिए सुरक्षित, दक्ष, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी। नई दिल्ली में सीईईडब्ल्यू में एक प्रमुख कार्यक्रम एनर्जी होराइजन 2019 में प्रमुख भाषण देते हुए प्रधान ने भारत के ऊर्जा संबंधी परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण रूझानों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भू-राजनीति के कारण हमें ऊर्जा बाजार की अस्थिरता से निपटना होगा और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि यह गतिशीलता परिवर्तनकारी है और हमें भारत के लिए विस्तृत योजना तैयार करनी होगी। कारोबारियों को व्यवधानों के लिए तैयार रहने के लिए सतर्क करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि इनके लिए हमें लीक से हटकर सोचना होगा। भविष्य के कार्यों और कार्यबल तैयार करने की आवश्यकता के बारे में उन्होंने कहा कि संगठनों तथा देश को अपने यहां उपलब्ध प्रतिभा की तैयारी का आकलन करना होगा और उन्हें व्यवधानों के लिए तैयार करना होगा। प्रधान ने कहा, “हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जो प्रमुख ऊर्जा संबंधी बदलावों के संक्रमण से गुजर रही है। दुनिया की तेजी से बढ़ती विशाल अर्थव्यवस्थाओँ में से एक तथा वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता होने के नाते भारत ऊर्जा संबंधी बदलाव को वास्तव में अपना रहा है।” उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में भारत में हुई जबरदस्त प्रगति आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के विशाल आयाम को कवर करने वाले श्रृंखलाबद्ध नीतिगत सुधारों के माध्यम से हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार समावेशी, परिपूर्ण और निरंतर उच्च आर्थिक प्रगति के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 तक भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनाने के लिए हम मिशन मोड में कार्य कर रहे हैं। प्रधान ने कहा कि 5 ट्रिलियन अ‍र्थव्‍यवस्‍था को गति प्रदान करने के लिए सुरक्षित, दक्ष, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2035 तक भारत की ऊर्जा खपत के प्रतिवर्ष 4.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो विश्व की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से सबसे तीव्र होगी। जहां एक ओर वर्ष 2017 में भारत की ऊर्जा संबंधी मांग बढ़कर 754 मिलियन टन तेल हो गई वहीं प्रतिव्यक्ति ऊर्जा खपत अब भी वैश्विक औसत से काफी कम है। मजबूत आर्थिक विकास के कारण कुल वैश्विक प्राथमिक ऊर्जा मांग में भारत की हिस्सेदारी का वर्ष 2040 तक मोटे तौर पर दोगुनी होकर लगभग 11 प्रतिशत होना तय है। जटिल और तेजी से बढ़ती हमारी ऊर्जा संबंधी जरूरतों की प्रकृति को देखते हुए हमें ऊर्जा के ऐसे सभी स्रोतों पर निर्भर करना होगा, जो सुरक्षित, दक्ष, किफायती और टिकाऊ हैं। कोयले, तेल, गैस, जैव-ईंधन, परमाणु, पनबिजली, सौर और पवन का सार्थक योगदान आवश्यक होगा।