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मुन्नी-राहुल बने जीडीए चुनाव के सबसे बड़े गेम फिनिशर

हाथी पर होकर सवार साइकिल ने फतह कर दिया जीडीए द्वार
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। जीडीए बोर्ड चुनाव में जिस तरह सपा ने यहां चौंकाने वाली जीत हासिल की है और उसने जिस तरह से यहां रणनीति के तहत चाल चलते हुए अपनी हार को जीत में बदला है। उसके सबसे बड़े हीरो समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र मुन्नी एवं महानगर अध्यक्ष राहुल चौधरी बनकर उभरे हैं। मुन्नी-राहुल ने उस गेम को अपने हाथ में लिया, जिस गेम को सब हारा हुआ मान रहे थे। मुन्नी-राहुल ने गेम को इस तरह से प्लान किया कि यहां समाजवादी खेमा नतीजे के बाद जश्न में डूब गया और सुरेन्द्र मुन्नी एवं राहुल चौधरी इस गेम के सबसे बड़े गेम फिनिशर बनकर उभरे। सपा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र मुन्नी व महानगर अध्यक्ष राहुल चौधरी ने एक नजीर पेश करते हुए खुद को इस गेम का वजीर साबित कर दिया।
सपा के पास यहां महज पांच वोट थी, जबकि कांग्रेस के पास 16 और बसपा के पास 13 वोट थे। यहां महानगर संगठन के सामने चुनौती थी और अध्यक्षों ने उसे स्वीकार किया। अध्यक्षों की क्षमता भी तभी मानी जाती है जब खाते में कुछ न हो और संगठन सीट निकालकर दे दे। मुन्नी और राहुल रात भर रणनीति बनाते रहे और सोमवार की सुबह वह नगर निगम पहुंचे। जब उन्होंने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी यहां चुनाव लड़ने जा रही है तो सब हंसने लगे। किसी को यकीन ही नहीं था कि सपा यहां चुनाव जीत जाएगी। लेकिन सुरेन्द्र मुन्नी और राहुल चौधरी मंझे हुए नेता हैं और हल्की बात नहीं करते। यहां उन्होंने गेम प्लान किया और बसपा से हाथ मिलाया। उन्होंने बसपा जिलाध्यक्ष को विश्वास में लिया। गेम थोड़ा सा बदला जब निर्दलीय पार्षद अमित पंत और बसपा पार्षद आनंद ने नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। यहां राहुल चौधरी ने जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मुन्नी को साथ लेकर ऐसी रणनीति से काम किया कि दोनों का पर्चा वापस करा दिया।
इसके बाद जब हल्ला मच रहा था कि कांग्रेस का उम्मीदवार चुनाव जीतेगा और बसपा के दो एमएलसी वोट डालने ही नहीं आए, तब मुन्नी-राहुल ने संगठन के अध्यक्ष के रूप में वोटों का गेम अपने पक्ष में कर लिया और वह सुबह से निगम में ही डेरा डालकर बैठ गए। लगातार फोन चलता रहा और वोट साइकिल के पक्ष में होते रहे। सपा के वोट बिखरने नहीं दिये और दूसरे दल के वोट को अपने पक्ष में ले आए। संगठन के लिहाज से यह एक बड़ी जीत है।
जब नतीजा आया तो सुरेन्द्र मुन्नी और राहुल चौधरी सबसे बड़े गेम फिनिशर के रूप में सामने आए। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए भी यह एक खबर है कि उन्हें आने वाले चुनाव की रणनीति के लिए एक बड़ा रणनीतिकार गाजियाबाद की सियासत में ही मिल गया है। ऐसे रणनीति जानकार यूथ नेताओं को यदि टीम अखिलेश का हिस्सा बनाया जाएगा तो फिर समाजवादी पार्टी यहां लोकसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर कर सकती है। राहुल चौधरी महानगर अध्यक्ष के रूप में वह चेहरा बनकर सामने आए हैं जिनसे दूसरे अध्यक्षों को भी सीख लेनी चाहिए। हारी हुई बाजी को जिस तरह से जीतकर राहुल चौधरी ने समाजवादी का नाम किया है, उससे वह एक बड़े नायक बनकर उभरे हैं।

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