देश
एमपी के सीएम ने बेटे की शादी सामूहिक विवाह समारोह में कराई, कहा- प्रधानमंत्री से प्रेरणा मिली है
उज्जैन। करंट क्राइम। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं जिनके बेटे की शादी किसी सामूहिक विवाह कार्यक्रम में संपन्न हुई है। इस कार्यक्रम में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बाराती बने और उन्होंने सभी नव-दंपतियों को आशीर्वाद दिया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के बेटे डॉक्टर अभिमन्यु यादव की शादी डॉक्टर इशिता यादव के साथ संपन्न हो गई। खास बात ये है कि सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम में आयोजित की गई।
अभिमन्यु यादव की खरगोन जिले के किसान दिनेश पटेल यादव की बेटी डॉक्टर इशिता यादव से सामूहिक विवाह सम्मेलन में शादी हुई। डॉक्टर अभिमन्यु यादव ने एमबीबीएस के साथ मास्टर ऑफ सर्जन की डिग्री हासिल की है जबकि उनकी पत्नी इशिता यादव अभी एमबीबीएस कर रही हैं।
उज्जैन में शादी होने से पहले सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी की सारी रस्में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित की गईं, उसके बाद गीता कॉलोनी में माता पूजन की रस्म पूरी की गई। इस दौरान अभिमन्यु यादव और उनकी पत्नी इशिता यादव की एक रस्म सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है जिसमें अभिमन्यु अपनी पत्नी इशिता के साथ बैलगाड़ी पर बैठे हुए हैं।
अपने बेटे की शादी सामूहिक विवाह कार्यक्रम में संपन्न करवाने वाले एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के दिए मंत्र सबका साथ सबका विकास का पालन किया है। उनके इस प्रयास में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की झलक दिखती है। समाज के सभी वर्ग के लोग साथ आए ये हमारे लिए गर्व की बात है।
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बहादुर जवानों की वजह से बच गई थी 200 सांसदों की जान, जानिए 2001 की संसद पर हमले की कहानी
नई दिल्ली। करंट क्राइम। 13 दिसंबर 2001 का दिन था। सुबह करीब साढ़े 11 बजे उपराष्ट्रपति के सिक्योरिटी गार्ड उनके बाहर आने का इंतजार कर रहे थे, तभी एक सफेद एंबेसडर में सवार 5 आतंकी गेट नंबर-12 से संसद के अंदर घुसे। उस समय सिक्योरिटी गार्ड निहत्थे हुआ करते थे। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, सिक्योरिटी गार्ड उस एंबेसडर के पीछे भागने लगे। उसी समय आतंकियों की कार उपराष्ट्रपति की कार से टकराई और हर तरफ हड़कंप मच गया। सुरक्षाकर्मी अलर्ट हो गए।
घबराए आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान पांचों आंतकी एके-47 और हैंडग्रेनेड से लैस थे, उनकी पीठ और कंधे पर बैग थे। पहली बार आतंक लोकतंत्र की दहलीज पार कर चुका था। देखते ही देखते लोकतंत्र का पूरा मंदिर गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। आतंकियों के पहले हमले का निशाना वो चार सुरक्षाकर्मी बने जो एंबेसडर कार को रोकने का प्रयास कर रहे थे। इसी फायरिंग के बीच धमाके की आवाज आती है।
अब तक तस्वीर साफ हो गई थी कि संसद भवन में आतंकी हमला हो चुका है। इसके तुरंत बाद संसद भवन के सभी दरवाजे बंद कर दिए गए। अंदर मौजूद तमाम सांसद और मंत्रियों को महफूज जगह पर ले जाया गया। वहीं बाहर सुरक्षाकर्मी मोर्चा संभाले हुए थे।
पांचों में से एक आंतकी ने गेट नंबर 1 से सदन के अंदर दाखिल होने की कोशिश की। लेकिन सुरक्षाबलों की गोली से वो ढेर हो गया। फिर बाकी चार आतंकियों ने गेटर नंबर 4 की तरफ बढ़ने की कोशिश की, वो वापस मुड़कर गेट नंबर 9 पर पहुंचे। लेकिन मुस्तैद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और पूरा ऑपरेशन गेट नंबर 9 के पास सिमट गया। यहीं मुठभेड़ में एक-एक कर तीन आतंकी ढेर हो गए। आखिरी बचा आतंकी गेट नंबर एक की ओर भागा, लेकिन गोली लगने से उसका खेल भी वहीं खत्म हो गया। संसद परिसर में ये खूनी खेल सुबह लगभग 11.30 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चला।
इस हमले में आतंकियों से लोहा लेते हुए संसद भवन के गार्ड, दिल्ली पुलिस के जवान समेत कुल 9 लोग शहीद हुए थे। फिर संसद पर आतंकी हमले की जांच दिल्ली पुलिस ने की और इस साजिश का पर्दफाश करने में कामयाब रही। जांच में पता चला कि आतंकियों को पाकिस्तान से गाइडेंस मिली थी। हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु, एसएआर गिलानी, अफशान गुरु और शौकत हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसएआर गिलानी और अफशान गुरु को बरी कर दिया। शौकत हुसैन की सजा कम कर दी गई। वहीं अफजल गुरु को फांसी की सजा हुई।
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संसद हमले की आज बरसीं, प्रधानमंत्री मोदी, नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत सांसदों ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि
नई दिल्ली। करंट क्राइम। संसद पर आतंकी हमले की आज बरसी है। संसद परिसर में आज आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी समेत सभी वरिष्ठ सांसदों ने शहीद जवानों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
आज ही के दिन, 13 दिसंबर 2001 को संसद पर आतंकी हमला हुआ था जिसमें कुल 9 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। पांच आतंकियों ने 45 मिनट के अंदर लोकतंत्र के मंदिर को गोलियों से छलनी कर देश को दहला दिया था।
आज से ठीक 24 साल पहले लगभग अभी की तरह ही संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था। महिला आरक्षण बिल पर हंगामे के बाद सुबह 11 बजकर 2 मिनट पर सदन को स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी संसद से जा चुके थे। लेकिन हमले के वक्त 200 से ज्यादा सांसद और मंत्री संसद के भीतर ही मौजूद थे।
इसी दौरान पाकिस्तान समर्थित पांच आतंकियों ने 45 मिनट में लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को गोलियों से छलनी करके पूरे देश को दहला दिया था।
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