माह-ए-रमजान मुबारक

0
526

सभी मुस्लिम भाइयों को माह-ए-रमजान की बहुत-बहुत मुबारक बाद। कहते हैं कि इस पाक महीने में खुदा अपने बंदों की फरियाद पूरी करते हैं। (latest ghaziabad hindi news) वैसे तो हर पर्व भाईचारे का संदेश देता है, लेकिन रमजान के अपने अलग ही मायने हैं। खुदा की इबादत में लगा हर शख्स नेकियों के रास्ते पर चलने का संकल्प लेता है और यही नेकियां इन्सान को औरों से अलग करती हैं। नेकियां इनसान में आपसी द्वेष भुलाकर एकजुटता का संदेश भी देती है। रमजान की महत्वता को जानकर ही इसको समझा जा सकता है। मस्जिदों में शुक्रवार की रात से तरावीह शुरु हो चुकी है। इस्लाम और मुसलमान क्या है? इस्लाम धर्म में अच्छे इंसान को बखूबी परिभाषित किया गया है। इसके लिए मुसलमान होना ही काफी नहीं, बल्कि बुनियादी पांच कर्तव्यों को अमल में लाना आवश्यक है। पहला ईमान, दूसरा नमाज, तीसरा रोजा, चौथा हज और पांचवां जकात। इस्लाम में बताए गए इन पांच कर्तव्य इस्लाम को मानने वाले इंसान से प्रेम, सहानुभूति, सहायता तथा हमदर्दी की प्रेरणा स्वत: पैदा कर देते हैं। रमजान में रोजे को अरबी में सोम कहते हैं, जिसका मतलब है रुकना। रोजा यानी तमाम बुराइयों से परहेज करना। रोजे में दिन भर भूखा व प्यासा ही रहा जाता है। इसी तरह यदि किसी जगह लोग किसी की बुराई कर रहे हैं तो रोजेदार के लिए ऐसे स्थान पर खड़ा होना मना है। जब मुसलमान रोजा रखता है, उसके हृदय में भूखे व्यक्ति के लिए हमदर्दी पैदा होती है। रमजान में पुण्य के कामों का सबाव सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है। जकात इसी महीने में अदा की जाती है। रोजा झूठ, हिंसा, बुराई, रिश्वत तथा अन्य तमाम गलत कामों से बचने की प्रेरणा देता है। इसका अभ्यास यानी पूरे एक महीना कराया जाता है ताकि इंसान पूरे साल तमाम बुराइयों से बचे। कुरान में अल्लाह ने फरमाया कि रोजा तुम्हारे ऊपर इसलिए फर्ज किया है, ताकि तुम खुदा से डरने वाले बनो और खुदा से डरने का मतलब यह है कि इंसान अपने अंदर विनम्रता तथा कोमलता पैदा करे?