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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

बसपा और सपा के युवा चेहरों को भा रहा है गठबंधन फार्मुला

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। राजनीति में एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले सपा और बसपा अब हाथ मिलाने को तैयार हैं। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद साईकिल वालों ने हाथ वालों से जो हाथ मिलाया था उसमें हाथ वाले सात पर ही सिमट गए। हाथ वाले खुद भी डूबे और साईकिल को भी ले डूबे। वहीं चुनाव नतीजों के बाद हाथी वालों के खेमें में ऐसा घमासान मचा कि अब उन्हें भी अपने हाथ में कुछ दिखाई नहीं दे रहा। वहीं एक दशक के बाद सपा और बसपा में राजनीतिक चेहरे बदल रहे हैं। अब सपा में भी चुनाव से पहले मचे समाजवादी घमासान के बाद लीडरशिप बदल गयी है। युवाओं की बड़ी टोली अब आईएमविद अखिलेश है। कई युवा चेहरे मजबूती के साथ राजनीतिक पिच पर बैटिंग कर रहे हैं। वहीं चुनाव के बाद नीले खेमें में भी सबकुछ बदल गया है। कल तक पर्दे के पीछे रहने वाले आनंद कुमार अब पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। बसपा सुप्रीमों मायावती खुद एलान कर चुकी हैं कि आनंद कुमार ही पार्टी के बड़े मसले देखेंगे। बसपा में भी अब नये नेताओं की पौध तैयार हो चुकी है। सपा और बसपा में नये नेताओं की ये नयी क्रांति अतीत के कड़वे अध्याय को नहीं जानती। दोनों ही दलों में जबसे गठबंधन की सुगबुगाहट शुरू हुई है तब से वे इस गठबंधन का स्वागत करने को तैयार हैं। वहीं भाजपा में पहले ही एंट्री बंद है। इस लिहाज से दोनों ही दलों के युवा चेहरों के लिए गठबंधन की राजनीति का ये पहला मौका होगा। दोनों ही दल अब नये नेताओं और नये तेवरों के साथ नये राजनीतिक युग की शुरूआत करेंगे। वहीं रालोद में भी जयंत चौधरी को लेकर युवा जाट चेहरे उनके साथ होंगे। बड़ी बात यह होगी कि भाजपा से उपेक्षित कई अन्य चेहरे भी सपा और बसपा के साथ आने वाले समय में आ सकते हैं। अभी जिस गठबंधन को भाजपा हल्के में ले रही है, यही गठबंधन चुनाव के समय उसे चुनौती देगा। क्योंकि इस गठबंधन में कई मुस्लिम और दलित युवा चेहरे पूरी ऊर्जा के साथ राजनीति में उतरेंगे। अखिलेश यादव के पास भी सत्ता के बाद अब विपक्ष की राजनीति करने और खुद को जन नेता साबित करने का यह बड़ा मौका होगा।

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