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दूध में हो रही यूरिया और डिटर्जेंट पावडर की मिलावट प्रदेश के 13 जिलों से लिए सेंपल में पाई गई मिलावट

भोपाल (ईएमएस)। त्यौहार को मौसम हो और मिठाई का स्वाद ना हो तो सबकुछ फींका सा लगता है, लेकिन मिठाई खाने से पहले थोडा सतर्क होना जरुरी है क्योंकि मिठाई जिस दूध से बनाई जा रही है, हो सकता है उसमें यूरिया और डिटर्जेंट पावडर की मिलावट हों। यह मिलावट आपको खुशियों की जगह जिंदगी भर का दर्द दे सकती है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसआई) ने प्रदेश के सभी जिलों से खुले और पैक दूध के तीन महीने पहले नमूने लेकर मौके पर ही जांच की थी। अथारिटी ने सितंबर में मप्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन को भेजी रिपोर्ट में मिलावट का खुलासा किया है। हालांकि, सुकून की बात यह है कि भोपाल में बिक रहे दूध में सिर्फ पानी की मिलावट पाई गई है। पानी की मिलावट सभी जिलों के दूध में मिली है। अलग-अलग जिलों में 70 से 90 फीसदी नमूनों में पानी की मिलावट मिली है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अफसरों ने कहा कि जानवरों को ज्यादा यूरिया वाली घास खिलाने से भी दूध में कुछ मात्रा में यूरिया आ सकती है। लिहाजा इन जिलों में फिर से लीगल नमूने लेकर जांच कराई जा रही है। प्रदेश के जिन जिलों में यूरिया और डिटर्जेंट की मिलावट मिली है उनमें
इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम, अशोकनगर, भिंड, बालाघाट, होशंगाबाद, खंडवा, खरगौन, बुरहानपुर, बड़वानी और सिवनी शामिल है। एफएसएसएआई ने एक निजी लैब को देशभर में दूध के नमूने एक साथ जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
मप्र के सभी जिलों में यह जांच की गई। हर जिले से 20 नमूने अलग-अलग क्षेत्र से लिए गए। इसमें खुला और पैक दूध दोनो था। दूध की मौके पर ही जांच की गई। इसके बाद लैब ने एफएसएसएआई को रिपोर्ट भेजी। एफएसएसआई ने मप्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन को यह रिपोर्ट भेजकर निगरानी रखने को कहा है। एफएसएसएआई ने यह जांच सिर्फ निगरानी (सर्विलांस) के तौर पर कराई थी। लिहाजा यूरिया और डिटर्जेंट मिलने के बाद भी दूध बेचने वालों पर लीगल कार्रवाई नहीं की जा सकती। एफएसएसआई ने यह भी नहीं बताया है कि सैंपल कहां और किससे लिया। इस कारण विक्रेताओं को चेतावनी भी नहीं दी जा सकती।लीगल नमूने लिए जा रहे हैं। मिलावट से होने वाले नुकसान के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि इनसे सबसे ज्यादा नुकसान किडनी को होता है। यूरिया और डिटर्जेंट में केमिकल होते हैं। इनसे आंतें खराब हो जाती हैं। दूध में मिलाया जा रहा पानी भी शुद्घ नहीं है तो हेवी मेटल से कैंसर होने के साथ लिवर, किडनी खराब होने का डर रहता है। इस बारे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के संयुक्त नियंत्रक डॉ. ब्रजेश सक्सेना का कहना है कि एफएसएसआई ने 13 जिलों में दूध के नमूनों में यूरिया और डिटर्जेंट होने की बात कही है। यह नमूने सिर्फ निगरानी के खातिर लिए गए थे। अब इन जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी लीगल नमूने ले रहे हैं, जिससे मिलावट करने वालों पर कार्रवाई की जा सके। नमूने असुरक्षित पाए जाने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

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