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अल्पसंख्यक समाज को आबादी से कई गुना ज्यादा लाभ मिला : योगी

लखनऊ| उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी योजना में आप जाएंगे तो आप पाएंगे, आबादी के हिसाब से देखेंगे, तो अल्पसंख्यक समाज को उससे कई गुना ज्यादा लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने बुधवार को विधान परिषद में बजट पर चर्चा के दौरान कहा कि प्रदेश में अल्पसंख्यकों की आबादी 17 से 19 फीसदी है और अल्पसंख्यक समाज को योजनाओं का लाभ 30 से 35 फीसदी मिलता है।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के पास न विजन था और न ही करने की चाह थी। सपा सरकार में 20 करोड़ की आबादी के लिए दो लाख करोड़ का बजट पेश किया जाना, ऊंट के मुंह में जीरा है। पहले की सरकार में पिक एंड चूज होता था, लेकिन आज कोई ऐसा नहीं कह सकता। “हमने तुष्टीकरण नहीं किया, बल्कि ईमानदारी से काम किया। दो लाख करोड़ में आप यह नहीं कर सकते थे।”

उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं को गिनाते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री आवास, सौभाग्य, उज्ज्वला, खाद्यान्न योजना, आयुष्मान भारत या मुख्यमंत्री जनआरोग्य योजना, किसी भी योजना में आप जाएंगे तो आप पाएंगे, आबादी के हिसाब से देखेंगे, तो अल्पसंख्यक समाज को उससे कई गुना ज्यादा लाभ मिल रहा है। यह सरकार की ईमानदारी और सबका साथ, सबका विकास की प्रधानमंत्री के उस संकल्प और भाव के अनुरूप है, जो उन्होंने 2014 में सरकार बनाने के पहले देश को एक स्लोगन दिया था कि सरकार आएगी, तो कैसे काम करेगी। आप देख सकते हैं, कहीं कोई भेदभाव किसी के साथ नहीं हुआ है।”

उन्होंने कहा कि देश में आजादी के समय प्रदेश की अर्थव्यवस्था टॉप पर थी। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी, कांग्रेस या अन्य दल जो उस समय सत्ता में थे। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगातार गिरती गई और 2015-16 आते-आते यह पांचवें और छठे नंबर पर पहुंच गई।

उन्होंने कहा, “एक थीम के तहत हमने बजट पेश किया। बजट का दायरा कोरोना की चुनौतियों के बावजूद बढ़ाया गया। पहले बजट का दायरा सीमित था, लेकिन हम आज साढ़े पांच लाख करोड़ तक पहुंचे हैं।”

योगी ने कहा, “दुनिया के राष्ट्रध्यक्ष या राजदूत आते हैं और जब हम अपनी बात उनके सामने रखते थे, तो हमें यह बताते हुए कई बार संकोच होता था कि हम देश की आबादी के सबसे बड़े राज्य हैं। जबकि उनका यह सोच होती थी कि हमारी अगली बात जो निकलेगी वह यह होगी कि हम देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी हैं, लेकिन हम इसे नहीं बोल पाते थे।”

उन्होंने कहा कि बजट सरकार का सामान्य लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि रोडमैप भी होता है। उन्होंने सपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि 20 करोड़ की आबादी का राज्य दो लाख करोड़ का बजट ऊंट के मुंह में जीरा है। जबकि उस समय प्रदेश में 30 फीसदी से ऊपर ऋणग्रस्तता थी। एफआरपीएम की सीमा का भी पालन नहीं हो रहा था, तब भी बजट कितना था? दो लाख करोड़। 20 करोड़ की आबादी को उसकी बुनियादी सुविधाएं इंफ्रास्ट्रक्च र डेवलपमेंट, किसानों, युवाओं, महिलाओं, गांव, नगरों, समाज के हर तबके के लिए क्या हम ईमानदारी से कार्य कर पाते। इसीलिए पिक एंड चूज होता था।

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