मायावती ने फिर की बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग

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लखनऊ (ईएमएस)। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने कहा कि बीजेपी के पक्ष में जो एकतरफा चुनाव परिणाम आये हैं वे अप्रत्याशित व जनपेक्षा के विपरीत है, जो बिना किसी सुनियोजित गड़बड़ी व धांधली के संभव ही नहीं है। इसीलिए ईवीएम को हटाकार दुनिया के अन्य देशों की तरह ही बैलेट पेपर से चुनाव अपने देश में भी कराया जाना चाहिए।
देश में 17वीं लोकसभा के आमचुनाव में बीजेपी की संदेहास्पद जीत के संदर्भ में रविवार को यहाँ बसपा उत्तर प्रदेश राज्य कार्यालय में आयोजित पार्टी की अखिल भारतीय बैठक में ईवीएम के मार्फत लोकतंत्र व जनमत को हाईजैक करने की राष्ट्रीय चिन्ता पर गहन विचार-विमर्श किया गया तथा यह पाया गया कि ’एक देश, एक चुनाव’ बीजेपी का नया पाखण्ड वास्तव में इनकी चुनावी धांधलियों पर पर्दा डालने व बार-बार चुनाव में गड़बड़ी करके जीतने से बचने का प्रयास है। अगर देश में लोकसभा व सभी राज्यों में विधानसभा का आमचुनाव एक बार में एक साथ होगा तो फिर एक ही धांधली में बीजेपी का षड़यंत्र सफल हो जाएगा व देश पूरी तरह से विपक्ष-मुक्त होकर जातिवाद के अंधकार युग में चला जाएगा।
बसपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी की इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अतिरिक्त जिला कोआर्डिनेटर भी शामिल हुये। बैठक में सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं के मोबाइल फोन और डिजीटल घड़िया बाहर रखवा ली गयीं थीं। बैठक के बाद पार्टी द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि बीजेपी की जीत में अगर धांधली आदि नहीं है व उसे भारी जनमत प्राप्त है तो फिर बीजेपी एण्ड कम्पनी समय-समय पर जनता के बीच जाने से क्यों डरती है तथा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की व्यवस्था से क्यों कतरा रही है? बयान में कहा गया कि केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों से आए बी.एस.पी. प्रतिनिधिमण्डलों ने भी अपने-अपने प्रदेशों मंे ईवीएम में गड़बड़ी के प्रति जन आशंकाओं को आज की बैठक में रखा और इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि ईवीएम पूरी तरह से बीजेपी व पीएम नरेन्द्र मोदी के इशारे पर कैसे काम कर रही है? साथ ही, चुनाव आयोग ने जिस प्रकार से हर स्तर पर तथा कदम-कदम पर खासकर बीजेपी व नरेन्द्र मोदी के आगे घुटने टेके हैं उससे भी चुनाव के स्वतंत्र व निष्पक्ष होने पर गहरी आशंका देशभर में पाई जाती है, जिससे देश में लोकतंत्र कमजोर हुआ है।
बयान में कहा गया कि सत्ताधारी बीजेपी की देश में एक चुनाव के सम्बन्ध में अगर नीयत में खोट व नीति गलत नहीं होती तो इन्होंने बीजेपी शासित हरियाणा, महाराष्ट्र आदि राज्यों के भी चुनाव लोकसभा के आमचुनाव के साथ ही क्यों नहीं कराया जहाँ अब चुनाव होना निर्धारित है। मायावती ने कहा कि देश की लगभग सभी प्रमुख विपक्षी पार्टिंयाँ ईवीएम के बजाए बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर एकमत हैं, लेकिन बीजेपी व चुनाव आयोग इसके खिलाफ हैं जिससे देश में बेचैनी है। इसलिए बीजेपी अगर अपनी हठधर्मी पर अड़ी रही तो विरोध के अन्य उपायों पर भी जनता को विचार करना पड़ सकता है। फिर भी जब तक बीजेपी जनता के इस माँग की परवाह नहीं करती है और ईवीएम से ही चुनाव कराने पर अड़ी रहती है तो आने वाले उपचुनाव व चुनावों के लिए पार्टी के लोगों को उसी के हिसाब से तैयारी करनी है और ईवीएम की गड़बड़ियों का हर प्रकार से डट कर मुकाबला करने के लिए तैयार रहना है।
उन्होंने पार्टी संगठन की मजबूती तथा साल 2007 की तरह भाईचारा के आधार पर जनाधार को व्यापक बनाने पर जोर दिया। पार्टी संगठन का काम, जो लोकसभा चुनाव के कारण रूक गया था, उसे गति प्रदान करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए तथा अखिल भारतीय बैठक के बाद विभिन्न राज्यों की अलग-अलग बैठक करके उन्हें आगे की तैयारी व संगठन में आवश्यक फेरबदल के निर्देश दिए। मायावती ने इस अवसर पर बसपा के नवनिर्वाचित सांसदों को निर्देश दिया कि वे व्यापक जनहित व देशहित के मामलों पर संसद में अपनी सार्थक भूमिका निभायें और साथ ही अपने-अपने क्षेत्र की जनता की सेवा में कोई कोर-कसर ना छोड़ें। जनता की सच्ची सेवा को अपनी असली धर्म समझें। यही निर्देश उन्होंने पार्टी विधायकों को भी दिया।