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कोरोना दौर में संकट में है इंसान-डाक्टर रश्मि दूबे

गाजियाबाद। जनपद गाजियाबाद निवासी डाक्टर रश्मि दूबे ने कोरोना दौर में इंसान किन परिस्थितियों से गुजर रहा है उसे कविता के माध्यम से प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया है। उन्होंने अपनी कविता में वर्तमान परिस्थितियों को शब्दों के माध्यम से उकेरने का काम किया है।
भूखे प्यासे बिलख रहे हैं गुरबत के मारे
देखो सारे के सारे हैं किस्मत के मारे

जाने क्या सूझी है इनको क्यों घर को आते
तिल तिल कर मरते जाते किस हसरत के मारे

रोजी रोटी छूटी है सब जीने के लाले
मरते क्या ना करते ये थे फुर्सत के मारे

मंदिर मस्जिद बंद पड़े हैं कौन सहायक हो बेचारे घर लौट पड़े थे दहशत के मारे

कुछ तो खुद ही पागल थे घर लौट चलें जल्दी कुछ बेचारे फँस बैठे सुहबत के मारे

सोचा कुछ ना निकल पड़े थे ले अपनी गठरी लम्हा लम्हा कत्ल हुए वे चाहत के मारे

किससे कौन शिकायत बोले सब इक जैसे हैं दर.दर भटक रहे हैं बेचारे हालत के मारे ।

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