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मध्यप्रदेश विधानसभा 2018 विशेष जरा सी चूक भी ले डूबेगी

रायसेन (ईएमएस)। जिले की सभी चार विधानसभा सीटों-सांची, सिलवानी, भोजपुर और उदयपुरा पर भाजपा का कब्जा हैइस बार कांग्रेस अपनी वापसी की तैयारी में है, हालांकि उसके लिए यह कर पाना बहुत मुश्किल होगा.जिले में जो सियासी हालात बन रहे हैं, उन्हें देखकर लगता है कि इस बार भाजपा को नुकसान होगाइसी के चलते कांग्रेस को लगने लगा है कि उसकी उम्मीदें परवान चढ़ेंगीगौरतलब है कि रायसेन वह वीआईपी जिला है, जहाँ के चार में से तीन विधायक मंत्री हैं सांची से गौरी शंकर शेजवार, सिलवानी से रामपाल सिंह और भोजपुर से सुरेन्द्र पटवाये तीनों ही मंत्री कांग्रेस की हिट-लिस्ट में टॉप पर हैंदेखना होगा भाजपा दिग्गज नेता कैसे अपनी सीट बचा पाते हैं हालाँकि यहाँ भाजपा को अच्छा खासा समर्थन मिलता रहा है पिछले चुनाव में चारों सीटों पर बड़े अन्तर से जीत हासिल की थी लेकिन इस बार हालात पहले जैसे नहीं हैं जरा सी चूक भी महंगी पड़ सकती है। 2013 के चुनाव में जिले भर के 8 लाख 40 हजार 409 मतदाताओं में से 6 लाख 8 हजार 371 ने अपना फैसला मतदान के जरिए दिया था। जिले की चारों सीटों पर 8 हजार 796 मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों को नोटा के सहारे नकार दिया है। हालांकि उदयपुरा विधानसभा में तो नोटा को तीसरा स्थान मिला है। यहां कुल 2 लाख 14 हजार 996 मतदाताओं में से 1 लाख 51 हजार 373 मतदाताओं ने वोट दिए, जिसमें से 3 हजार 123 वोटरों ने नोटा को चुना। इसी तरह सिलवानी में 109, भोजपुर में 1964 और सांची में 2700 मतदाताओं ने नोटा के माध्यम से प्रत्याशियों को नकार दिया था ।
सांची :
अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सांची विधान सभा क्षेत्र में कांग्रेस के समक्ष हमेशा से सशक्त उम्मीदवार का संकट रहा हैइसी का फायदा भाजपा उठाती आ रही है 2013 मंत्री और विधायक गौरीशंकर शेजवार ने कांग्रेस के डॉप्रभुराम चौधरी को 20936 मतों शिकस्त देकर पिछली हार था २००८ के चुनाव में प्रभुराम चौधरी ने शेजवार को करीब 9000 मतों पराजित किया था। वहीँ 2003 के चुनाव में डॉ शेजवार ने कांग्रेस के शुभाष बाबू को 20886 वोटों से हराया था।
सिलवानी :
परिसीमन के बाद यहाँ 2008 में चुनाव हुए थे। सिलवानी में इस बार पूर्व विधायक देवेंद्र पटेल मंत्री रामपाल सिंह को रोकने के लिए पूरी तैयारी में हैंपटेल ने 2008 के चुनाव में उमा भारती की पार्टी-‘भारतीय जन शक्ति’ के प्रत्याशी के रूप में रामपाल सिंह को 247 वोटों से हराया था, लेकिन 2013 में उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर रामपाल सिंह के हाथों पराजित होना पड़ा था। रामपाल सिंह ने पटेल 17047 वोटों से मात दी थी।
भोजपुर :
मध्य प्रदेश की भोजपुर विधानसभा सीट रायसेन जिले में आती है ये राजधानी भोपाल से ज्यादा दूर नहीं है भोजपुर, राजा भोज के बनाए प्रसिद्ध शिव मंदिर और विशाल शिवलिंग के लिए विश्व विख्यात है इस सीट का कभी पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के नेता स्वसुंदरलाल पटवा प्रतिनिधित्व करते थेबता दें कि सुंदरलाल पटवा यहां से तीन बार विधायक रह चुके हैं अब उनके भतीजे सुरेंद्र पटवा विधायक हैंलंबे समय से इस सीट पर बीजेपी का कब्ज़ा है।
सुरेंद्र पटवा वर्तमान में संस्कृति और पर्यटन मंत्री भी हैं 2013 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता सुरेश पचौरी को हराया थापटवा को जहां 80491 वोट मिले थे तो वहीं पचौरी को 60342 वोट मिले थेपटवा ने पचौरी को 20 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था । बता दें कि पचौरी ने पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा था2013 के चुनाव से पहले एक बार उन्होंने भोपाल से लोकसभा का चुनाव लड़ा था जिसमें उन्हें हार का सामना करना पडा थावे पांच बार राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। 2008 के चुनाव की बात करें तो इस बार भी सुरेंद्र पटवा को जीत मिली थीपटवा को जहां 42960 वोट मिले थे, तो वहीं राजेश पटेल को 29294 वोट मिले थेपटवा ने राजेश पटेल तो 13 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।
यह सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता थी, लेकिन 1985 में जब सुंदरलाल पटवा यहां से पहली बार चुनाव लड़े, उसके बाद यहां कांग्रेस सिर्फ 2003 में ही चुनाव जीत पाई है 1967 में अस्तित्व में आई इस विधानसभा सीट पर पहली बार कांग्रेस की जीत हुईकांग्रेस के गुलाबचंद ने इस चुनाव में जीत हासिल कीगुलाबचंद यहां से लगातार दस साल विधायक रहे लेकिन 1985 के बाद इस सीट पर पटवा परिवार का कब्जा हो गया.1985 से 1998 तक सुंदरलाल पटवा ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कियाइसके बाद 2003 में उनके भतीजे सुरेंद्र पटवा यहां से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ेलेकिन वो कांग्रेस प्रत्याशी राजेश पटेल से हार गए।
उदयपुरा :
उदयपुरा विधानसभा सीट रायसेना जिले में आती हैयह क्षेत्र राजधानी भोपाल से 160 किमी दूर हैयहां पर ठाकुर और किराड़ जाति के लोगों की संख्या अच्छी खासी हैचुनाव में उम्मीदवारों की जीत का फैसला यही दो जाति करते हैं.2008 तक यह क्षेत्र बरेली के नाम से जाना जाता थापरिसीमन के बाद इस सीट का नाम उदयपुरा हो गयायहां पर कुल 2 लाख 30 हजार 330 मतदाता हैं यहां पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रहा है।
फिलहाल इस सीट पर बीजेपी का कब्जा हैबीजेपी के रामकिशन पटेल यहां के विधायक हैं2013 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के भगवान सिंह राजपूत को हराया थारामकिशन पटेल को 90950 वोट मिले थे, तो वहीं भगवान सिंह राजपूत को 46897 वोट मिले थेदोनों के बीच हार जीत का अंतर 44 हजार से ज्यादा वोटों का था। बात करें 2008 के चुनाव की तो इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी कांग्रेस के भगवान सिंह राजपूत ने बीजेपी को भगवत सिंह पटेल को हराया थाहालांकि यह मुकाबला करीबी थाभगवत सिर्फ 1434 वोट से हारे थे।

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