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लोनी में सपा हुई नेतृत्व विहीन: न राशिद का पता, न जाकिर का प्रमुख

 

संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। लोनी में समाजवादी पार्टी इस वक्त नेतृत्वविहीन नजर आ रही है। विगत विधानसभा चुनाव में पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद मलिक ने 50 हजार से ज्यादा वोट प्राप्त कर यहां सपा की राजनीति को जो बड़ा आॅक्सीजन दिया था, वह फिलहाल खत्म होता नजर आ रहा है। एक बार फिर समाजवादी पार्टी अर्श से फर्श पर नजर आ रही है। अब यहां स्थिति यह है कि लोनी का किसे नेता बोला जाए कुछ पता नहीं है। चुनाव हारने के बाद राशिद मलिक जहां इस क्षेत्र से लंबी दूरी नाप चुके हैं। वहीं बसपा से ररुखसत होकर सपा का दामन थामने वाले पूर्व विधायक हाजी जाकिर का भी कुछ पता नहीं चल रहा है। लोनी में सपा के नेता के तौर पर उनकी कोई खास गतिविधि नजर नहीं आ रही है। न ही किसी आयोजन में उन्हें देखा जा रहा है। हाल ही में सपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार मुन्नी ने प्रेसवार्ता की थी। वार्ता में पूर्व विधायक हाजी जाकिर दर्शकदीर्घा में बैठे नजर आए, जिससे यह साबित हुआ कि सपा पूर्व विधायक को अभी गंभीरता से नहीं ले रही है। यह हालात बताते हैं कि सपा संगठन लोनी में अपनी जड़ें खुद कमजोर कर रहा है। हाल ही में पूर्व जिलाध्यक्ष एवं गुर्जर समाज के चेहरे ईश्वर मावी ने भी सपा को छोड़कर हाथी की सवारी कर ली।
बसपा वालों ने उनकी ताकत को पहचाना और जोनल इंचार्ज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। यहां भी सपा ने कोई भरपाई नहीं की और एक पुराने नेता के जाने से समाजवादी पार्टी को झटका लगा। पूर्व जिलाध्यक्ष स्व. औलाद अली के सुपुत्र असद अली जिन्हें पार्टी ने राज्यमंत्री बनाकर अहम जिम्मेदारी थी।
असद अली भी पालिका चुनाव में कोई खास रिजल्ट नहीं दे पाए। फिलहाल वह कहां और किधर राजनीति कर रहे हैं, कुछ पता नहीं चल रहा है। पार्टी के प्रति अधिकतर समय सक्रियता दिखाने वाले पूर्व जीडीए बोर्ड मेंबर उम्मेद पहलवान भी अनदेखी का शिकार चल रहे हैं। हाल ही में लोनी से अहसान कुरैशी को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया है। इस घोषणा पर भी अंदरखाने सवाल उठने लगे हैं। जो भी हो लोनी में सपा की जो राजनीति चंद चेहरों के आसपास सीमित थी, वह फिलहाल और सिमट गई है।
2019 लोकसभा के चुनाव पास हैं और यह किसी से नहीं छिपा कि चुनावों के दौरान समाजवादी पार्टी को इस क्षेत्र से बड़ी बेवफाई मिली है। अगर ऐसा नहीं होता तो लोकसभा का चुनाव लड़े सुधन रावत यहां पांचवें नंबर पर नहीं आते, न ही आज वह बहुजन समाज पार्टी में होते।

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