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अशु वर्मा की रैंकिंग घटा देगी गंदे शहर की सूची

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। हाल ही में देशभर के गंदे शहरों की सूची जारी हुई है। गाजियाबाद शहर उन शहरों में शामिल हुआ जिसे सफाई के मामले में सौ शहरों की सूची में भी स्थान नहीं मिला है। गंदगी के मामले में उसे 351 रैंक प्राप्त हुई है। इस रैंकिंग में मेयर अशु वर्मा की रैंकिंग घटा दी है। गाजियाबाद वो शहर है जहां खुद मेयर अशु वर्मा ने सड़कों पर उतरकर स्कूली बच्चों के साथ पॉलीथीन चुगी थी। झाडू तो वह कई बार नगरीय क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में लगा चुके हैं। यहां भाजपा की स्वच्छता अभियान की ब्रांड एम्बेस्डर उदिता त्यागी भी रहती हैं। केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री व सांसद वीके सिंह भी रेलवे स्टेशन पर स्वच्छता अभियान के तहत झाड़ू लगा चुके हैं। सफाई को लेकर नगर निगम ही जिम्मेदार होता है। इस लिहाज से शहर यदि गंदा है तो माना जायेगा कि मेयर अशु वर्मा ने काम नहीं किया है। मेयर अशु वर्मा द्वारा स्वच्छता को लेकर चलाया गया अभियान यहां के लोगों में जाग्रति पैदा नहीं कर सका है। गंदे शहरों में गाजियाबाद का नाम कोई पहली बार नहीं आया है। इससे पहले भी गाजियाबाद शहर स्मार्ट सिटी की रेस में कई बार पिछड़ चुका है। यदि शहर पॉलीथीन चुगने और झाडू लगाने के बाद भी 351 नंबर पर है तो निगम के मुखिया के रूप में मेयर अशु वर्मा ही जिम्मेदार माने जायेंगे।
बता दें कि पिछले दिनों देशभर के स्वच्छ एवं गंदे शहरों के नाम प्रमुखता से प्रकाशित किए गए थे। जिसमें उत्तर प्रदेश के कई जनपदों को बेहद गंदा शहर माना गया था जिसमें जनपद गाजियाबाद का नाम भी शामिल था। जनपद गाजियाबाद को 351 वीं रैंक दी गई है जो बेहद सोचनीय विषय है। यदि जनपद गाजियाबाद गंदा शहर माना गया है तो फिर कैसे एक बार फिर से स्मार्ट सिटी की दौड़ में गाजियाबाद का नाम फाइनल हो सकेगा। ऐसे में मेयर अशु वर्मा के लिए उक्त रैंकिंग आने वाले दिनों में जरूर मुश्किले खड़ी करेगी।

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