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ग़ाजियाबाद

लाइन हाजिर: सजा या मजा

सैय्यद अली मेहंदी

गाजियाबाद/करंट क्राइम। कहने को तो पुलिस विभाग में लाइन हाजिर होने का मतलब होता है सजा। यानी जिस खाकीधारी को लाइन हाजिर होने का फरमान सुनाया गया है उसे किसी गलती के चलते सजा दी गयी है। लेकिन कुछ शातिर पुलिसकर्मी लाइन हाजिर होने की सजा को इस तरह
से इस्तेमाल करते हैं कि न सिर्फ वे अपनी ड्यूटी बहाल करा लेते हैं बल्कि मलाइदार पोस्टिंग भी हासिल कर लेते हैं।
असल में किसी भी वारदात या हंगामे के बाद जनता में पुलिस के प्रति आक्रोश होता है जिससे निपटने के लिए आला अफसर कुछ पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर देते हैं जिसके चलते जनता समझती है कि घटना के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को सजा मिल गई लेकिन वास्तव में लाइन हाजिर होने वाले पुलिसकर्मी की सेहत पर कोई खास फर्फ नहीं पड़ता है। लाइन हाजिर होते ही पुलिसकर्मी लाइन में आमद करा लेते हैं और लग जाते हैं जुगाड़बाजी में कि किस अफसर की शरण में जाकर पहले से भी अधिक कमाई वाली पोस्टिंग हासिल की जाए। यह बात हम हवा हवाई तौर पर नहीं बल्कि पूरी जिम्मेदारी से कह रहे हंै। जिसका आधार है पुलिस आॅफिस का रिकॉर्ड। जिसमें लगभग दर्जनों ऐसे सिपाही और दारोगा हैं जिन्होंने लाइन हाजिर होने के बाद जबरदस्त वापसी करते हुए पहले की अपेक्षा और अधिक मलाइदार पोस्टिंग हासिल करने में कामयाबी हासिल की है।
कोई फर्क नहीं पड़ता लाइन हाजिर होने पर
जिस प्रकार पुलिसकर्मी के लाइन हाजिर करने का पुलिस मैनुअल में कोई नियम नहीं है। ठीक इसी तरह लाइन हाजिर होने पर नई तैनाती में समय का कोई भी कोई नियम नहीं है। असल में लाइन हाजिर करना को सजा की श्रेणी में रखा ही नहीं जा सकता क्योंकि पुलिसकर्मी का किसी भी दृष्टिकोण से लाइन हाजिर होने पर कोई नुकसान नहीं होता है।
बात जायदा पुरानी नहीं है। गत वर्ष मार्च में थाना इंदिरापुरम की कौशाम्बी चौकी प्रभारी राम संजीवन यादव को लाइन हाजिर कर दिया था। दारोगा राम संजीवन यादव पर आरोप था कि उन्होंने एक व्यापारी के पुत्र अमित को अवैध रूप से कई घंटे न सिर्फ पुलिस चौकी में बैठाए रखा बल्कि उसके एटीएम कार्ड से लगभग 70 हजार रुपए भी निकले। जिसके बाद अमित को छोड़ा गया। शिकायत मिलने पर एसएसपी मामले की गम्भीरता को देखते हुए जांच तत्कालीन क्षेत्राधिकारी इंदिरापुरम कुमार रणविजय सिंह को सौंपी थी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक जांच में कौशाम्बी पुलिस चौकी प्रभारी राम संजीवन यादव कांस्टेबल सतवीर सिंह,भानु प्रताप एवं होमगार्ड अनिल कुमार को दोषी पाया गया था। इसके बाद एसएसपी ने सभी आरोपी पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया था। लेकिन दारोगा राम संजीवन यादव मात्र एक सप्ताह के अंदर न सिर्फ बहाल कर दिए गए बल्कि थाना लोनी की सबसे मलाइदार बॉर्डर पुलिस चौकी के प्रभारी नियुक्त कर दिए गए। मीडिया के साथ पुलिस विभाग में कई दिन तक इस बात की चर्चा रही की दारोगा जी को सजा मिली थी या ईनाम। इसके अलावा थाना सिहानी गेट में तैनात सिपाही प्रमोद भास्कर को भी एक मीडियाकर्मी की शिकायत के बाद पुलिस कप्तान ने वायरलेस सेट पर ही आदेश देकर लाइन हाजिर कर दिया था। सिहानीगेट में माल मुंशी के रूप में तैनात भास्कर ने भी एक ऊंची पहुंच वाले थाना प्रभारी की सिफारिश पर जल्द ही थाना लोनी में तैनाती हासिल कर ली थी।
दरअसल खाकीधारियों ने लाइनहाजिर होने की सूरत में एक ऐसा नायाब तरीका खोज लिया है जिसके चलते न सिर्फ ड्यूटी पर बहाली हो जाती है बल्कि मनचाही पोस्टिंग भी मिल जाती है। लाइन हाजिर होने के बाद अधिकतर पुलिसकर्मी किसी न किसी आला अफसर के घर का रास्ता पकड़ लेते हंै और अपनी पोस्ट के मुताबिक साहब के घरेलू काम करने लगते हंै। कुछ समय में ही साहब को खुश करने के बाद अपना दुखड़ा साहब या मेम साहब के सामने बयान करते हंै। इसके बाद का काम साहब अपने स्तर से करा देते हैं। लो जी मिल गयी मनचाही तैनाती। कभी-कभी किसी सिपाही या दारोगा को उनकी विशेषता के चलते आलाधिकारी खुद ही बहाल कर तैनाती दे देते हैं। कुछ समय पहले क्राइम ब्रांच में तैनात सिपाही विनय शर्मा, नीरज,अक्षय शर्मा, आदित्य भाटी, अरुण बालियान सहित 9 पुलिसकर्मियों को शिकायत मिलने पर लाइन हाजिर कर दिया गया था। क्राइम ब्रांच में तैनात सभी आरोपी पुलिसकर्मी सर्विलांस एवं मुखबिर तंत्र में महारत किए हुए थे। जिसके चलते जल्द ही सभी को बहाल कर दिया गया था। हालांकि सभी पुलिसकर्मियों को क्राइम ब्रांच से हटाकर विभिन्न थानों में तैनात किया गया था।

  • मिलती है पूरी सुविधा,करनी पड़ती है आधी ड्यूटी

लाइन हाजिर होने पर भी खाकीधारियों को कोई खास दिक्कत नहीं होती है क्योंकि थाने में तैनाती के दौरान जहां 12 से 16 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती थी वहीं लाइन में मात्र कुछ घंटे की ड्यूटी करने के बाद ही आराम मिल जाता है। मजे की बात यह है कि लाइन हाजिर होने पर खाकीधारी के वेतन-भत्तों एवं सर्विस रिकॉर्ड पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। आमतौर पर रिजर्व लाइन इंस्पेक्टर प्रति दिन सुबह ड्यूटी लगाता है। सभी पुलिस कर्मियों को शाम 8 बजे पुलिस लाइन में हाजिरी लगाना आवश्यक होता है।

  • क्यों और कैसे होती है लाइन हाजिर की कार्रवाई

लाइन हाजिर की कार्रवाई का कोई एक्ट नहीं है। दरअसल किसी खाकीधारी के गलत आचरण या ड्यूटी में लापरवाही की शिकायत मिलने पर दो तरह से लाइन हाजिर किया जाता है। किसी पुलिसकर्मी की शिकायत सीधे पुलिस कप्तान तक पहुंच जाए या फिर थाना प्रभारी के पास। किसी खाकीधारी की शिकायत या लापरवाही मिलने पर क्षेत्राधिकारी को रिपोर्ट दे। जिस पर क्षेत्राधिकारी लाइन हाजिर की संस्तुति कर अपनी रिपोर्ट पुलिस कप्तान को प्रेषित कर दे। वैसे पुलिस मैनुअल में लाइन हाजिर करने का कोई प्रावधान नहीं है।

  • लाइन हाजिर का मतलब मौज्जां ही मौज्जां

कुछ पुलिसकर्मी खुद ही लाइन हाजिर होने के रास्ते निकाल लेते हैं। क्योंकि यह तो मुमकिन नहीं है कि सभी खाकीधारियों को मनचाही पोस्टिंग मिल जाये और ड्यूटी के दौरान इतना टाइम ही नहीं मिलता है कि कहीं अपनी जुगाड़ लगाई जा सके। इसलिए कुछ शातिर पुलिसकर्मी खुद ही ड्यूटी में लापरवाही करना शुरू कर देते हैं जिसके बाद शिकायत मिलने पर उन्हें लाइन हाजिर कर दिया जाता है।

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