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अल्जाइमर के खतरे को जानें

आम तौर पर बड़ी उम्र में होने वाली अल्‍जाइमर मानसिक बीमारी है जो धीरे-धीरे होती है। इसकी शुरूआत मस्तिष्‍क के स्‍मरण-शक्ति को नियंत्रित करने वाले भाग में होती है और जब यह मस्तिष्‍क के दूसरे हिस्‍से में फैल जाती है तब भावों और व्‍यवहार की क्षमता को प्रभावित करने लगता है हालांकि अभी तक अल्जाइमर रोग के सही कारण ज्ञात नहीं है लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार, अल्जाइमर रोग शायद आनुवंशिक प्रभाव, जीवन शैली और पर्यावरण कारकों के परिणाम है जोकि समय के साथ मस्तिष्क को प्रभावित करते है।
आनुवांशिक कारण
विशिष्ट आनुवंशिक परिवर्तन जो कम से कम 5 प्रतिशत मामलों में रोग के विकास में नेतृत्व करने में मौजूद हैं। अल्जाइमर रोग के साथ अधिकांश लोगों का एक परिवारिक इतिहास की स्थिति नहीं है, लेकिन अल्जाइमर रोग के विकास के जोखिम बढ़ जाते है यदि किसी परिवार में यह बिमारी है।
धातु अंतर्ग्रहण
कुछ सिद्धांतों के अनुसार जस्ता या एल्यूमीनियम जैसी धातुएं संभवतः अल्जाइमर रोग में भूमिका निभाते हैं लेकिन यहां इन सिद्धांतों का समर्थन करने के लिए कोई ठोस सबूत है। इसलिए विशेषज्ञ आहार में जिंक को कम करने या एल्यूमीनियम, जैसे खाना पकाने के बर्तन या सोडा पॉप के डिब्बे से बचने की सलाह नहीं देते है।
हालांकि अल्जाइमर रोग के कारण ठीक से समझ नही सके है, मस्तिष्क पर अल्जाइमर रोग के प्रभाव स्पष्ट है। इस मस्तिष्क विकार में, मस्तिष्क की कोशिकाओं विकृत और नष्ट करता हैं, कम कोशिकाओं के परिणामस्वरूप, और वहाँ एक स्वस्थ मस्तिष्क की तुलना में जीवित कोशिकाओं के बीच कम कनेक्शन भी है। मस्तिष्क में रासायनिक दूत या न्यूरोट्रांसमीटर के नुकसान के साथ, विशेष रूप से ऐसिटिलकोलाइन है जो मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं के समुचित संचार की सुविधा है। ये सभी शायद अनुभूति, स्मृति और मानसिक प्रक्रिया में लगातार गिरावट के कारण है।
16 लाख लोग हैं अल्जाइमर से पीड़ित
अल्जाइमर भूलने की बीमारी है। बीमारी जब गंभीर स्थिति में पहुंच जाती है, तो मरीज अपने परिजनों और रिश्तेदारों को पहचनाना तक बंद कर देता है। देश में लगभग 16 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। भारत में लगभग 40 लाख लोग डीमेंशिया से पीड़ित हैं और इसमें अल्जाइमर के मामले सबसे ज्यादा हैं। तकरीबन 16 लाख मरीज अल्जाइमर से पीड़ित हैं।
अक्सर लोग समझते हैं कि ‘डीमेंशिया’ और ‘अल्जाइमर’ एक ही हैं हालांकि ये दोनों स्थितियां एक नहीं हैं, वास्तव में अल्जाइमर डीमेंशिया का एक प्रकार है। डीमेंशिया में कई बीमारियां शामिल हैं, जैसे अल्जाइमर रोग, फ्रंट टू टेम्पोरल डीमेंशिया, वैस्कुलर डीमेंशिया आदि। डीमेंशिया के मरीजों में शुरुआत में याददाश्त कमजोर होने लगती है और मरीज को रोज के काम करने में परेशानी होने लगती है। मरीज तारीखों, रास्तों और जरूरी कामों को भूलने लगता है।
बीमारी जब गंभीर स्थिति में पहुंच जाती है, तो मरीज अपने परिजनों और रिश्तेदारों को पहचनाना तक बंद कर देता है। उनके व्यवहार में कई तरह के बदलाव आ सकते हैं, जैसे गुस्सा या उग्र व्यवहार करना, मूड में बदलाव आना, दूसरों पर भरोसा न करना, अवसाद, समाज से दूरी बनाना या बेवजह इधर-उधर घूमने की आदत।

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