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खुशहाल पंजाब को अशांत करने हो रही हैं साजिशें: सेना प्रमुख रावत

नई दिल्ली (ईएमएस)। सेना प्रमुख विपिन रावत ने पंजाब को अशांत करने की साजिशों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि बाहरी कनेक्शन के जरिए पंजाब में उग्रवाद को फिर से जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर जल्दी एक्शन नहीं लिया गया तो काफी देर हो जाएगी। वह ‘भारत में आंतरिक सुरक्षा की बदलती रूपरेखा: रुझान और प्रतिक्रियाएं’ विषय पर आयोजित सेमिनार में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, रक्षा विशेषज्ञों, पूर्व सरकारी अफसरों और पुलिस अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी लिंकों और उकसावे के जरिए असम में भी उग्रवाद को पुनर्जीवित करने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा, पंजाब शांतिपूर्ण रहा है लेकिन बाहरी लिंकों के कारण राज्य में फिर से उग्रवाद को खड़ा करने की कोशिशें हो रही हैं। हमें काफी सतर्क रहना है। आर्मी चीफ ने आगे कहा, हमें ऐसा नहीं सोचना है कि हालात ठीक हैं। पंजाब में जो कुछ हो रहा है, उसको लेकर हम अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते हैं और अगर हम जल्द कोई एक्शन नहीं लेते हैं तो काफी देर हो जाएगी। ज्ञात हो कि खालिस्तान समर्थक मूवमेंट के दौरान 1980 के दशक में पंजाब ने उग्रवाद का बुरा दौर देखा है, जिस पर आखिरकार सरकार ने काबू पा लिया था।
पैनल चर्चा में उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने भी इस मामले पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब में उग्रवाद को फिर से जिंदा करने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने यूके में हाल में निकाली गई खालिस्तान समर्थित रैली का जिक्र किया, जिसमें ‘जनमत संग्रह 2020’ की मांग की गई थी। 12 अगस्त को लंदन में सैकड़ों लोग इस खालिस्तान समर्थित रैली में शामिल हुए थे। सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने कहा है कि रैली का मकसद 2020 में गैर-बाध्यकारी जनमत संग्रह के लिए जागरूकता पैदा करना है। इसके साथ ही मांग की गई है कि पंजाब को कथित आजादी दी जाए। हालांकि खालिस्तान समर्थित इस कदम के खिलाफ भारतीय समुदाय की ओर से भी ‘हम भारत के साथ’ और ‘लव माई इंडिया’ इवेंट्स आयोजित किए गए थे।
शनिवार को जनरल रावत ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है, लेकिन सवाल यह है कि हम इसका समाधान क्यों नहीं निकाल पा रहे हैं, क्योंकि इसके बाहरी लिंकेज हैं। इस इवेंट का आयोजन डिफेंस थिंक-टैंक (सेंटर फॉर लैंड ऐंड वॉरफेयर स्टडीज) ने किया था, जिसके रावत संरक्षक हैं। आर्मी चीफ ने जोर देते हुए कहा कि सेना के जरिए उग्रवाद से नहीं निबटा जा सकता है। उन्होंने इसके लिए सभी एजेंसियों- सरकार, सिविल प्रशासन, सेना और पुलिस से मिलकर एक अप्रोच पर काम करने की बात कही।

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