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उत्तर प्रदेश ग़ाजियाबाद

अटल बिहारी वाजपेयी के लिए वेदप्रकाश की दुकान से जाती थी खादी

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। पुराने शहर के ताजा करंट में आज हम आपको बताएंगे शहर की सबसे पुरानी खादी की दुकान प्रकाश टेक्सटाइल वालों के बारे में। शहर के प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से एक स्वर्गीय लाला बुधप्रकाश गर्ग ने देश की आजादी के कुछ वर्षों बाद ही खादी के बढ़ते चलन को देख सन 1952 में चौपला क्षेत्र की तेली वाली गली में खादी की दुकान खोली थी। उस समय लोगो में खादी के कपड़े पहनने का क्रेज रहता था। लाला बुधप्रकाश गर्ग के सुपुत्र वेद प्रकाश गर्ग ने बताया कि उन्होंने 14 वर्ष की आयु से ही अपने पिता का सहयोग करने के लिए दुकान पर बैठना शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि तब से लेकर आज तक भी लोगों में खादी के प्रति लगन का भाव कम नही हुआ। शहर की 65 वर्ष पुरानी खादी की दुकान पर आज तीसरी पीढ़ी कारोबार सम्भाल रही है। आई आई टी से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद खादी की दुकान संभाल रहे उज्जवल और हिमांशु का कहना है कि उन्होंने खादी का महत्व और युवा पीढ़ी को खादी के महत्व से जोड़ा है। उनकी दुकान पर मौजूद खादी की वैरायटी आज पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फेमस है। पार्षद से लेकर विधायक और सांसद से लेकर केंद्रीय मंत्रियों के परिधान की खादी यहीं से जाती है। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निजी सचिव शिवकुमार पारिख भी अटल बिहारी वाजपेयी के लिए खादी के वस्त्र लेने अक्सर उनकी दुकान पर आया करते थे। शहर की सबसे पुरानी और मशहूर खादी की इस दुकान पर हाथ की खादी के अलावा यहाँ पर भागलपुरी खादी, भागलपुरी सिल्क, मूंगा सिल्क, मधुबनी खादी, मटका सिल्क, कटिया सिल्क, बलकल सिल्क, बलबरी और लीलन के कपड़ों की सैकड़ों वेरायटी उपलब्ध है।

 

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