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पाकिस्तान में मनाया गया ‘कश्मीर शहीद दिवस’

इस्लामाबाद| पाकिस्तान में आज (सोमवार को) ‘कश्मीर शहीद दिवस’ मनाकर 1931 में डोगरा राजवंश के खिलाफ विद्रोह में मारे गए कश्मीर के लोगों को श्रद्धांजलि दी गई।
इस दिन को पाकिस्तान एक ऐसे अवसर के रूप में इस्तेमाल कर रहा है जिसमें उसके हिसाब से ‘कश्मीर के लोगों के उस संघर्ष पर और विचार किया जाए जो 89 साल पहले उपमहाद्वीप में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान डोगरा महाराजा के काल में किया गया और इसके बाद भारतीय सेनाओं के मुकाबले में जारी है।’
पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा कि 1947 में भारत के विभाजन और पाकिस्तान बनने के तुरंत बाद इस दिन को राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया गया और राजनीतिक और वैचारिक संबद्धता से ऊपर उठकर इसमें समाज के सभी वर्गो की भागीदारी रही।
पाकिस्तानी सेना की मीडिया इकाई इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के महानिदेशक मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने एक ट्वीट में कहा, “रक्त की गिरी एक भी बूंद को न तो भुलाया जा सकता है और न ही माफ किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा, “कश्मीर शहीद दिवस उन बहादुर कश्मीरियों की याद दिलाता है जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। इनके बहे खून की एक-एक बूंद को ना ही भुलाया जा सकेगा और ना ही माफ किया जाएगा। दर्शकों के भारतीय अत्याचार, अजेय भावना और स्वतंत्रता के वैध संघर्ष को दबा नहीं सके जिसका सफल होना अवश्यंभावी है।”
प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी कश्मीर के लोगों को ‘जम्मू एवं कश्मीर पर अवैध और दमनकारी भारतीय कब्जे के खिलाफ’ लड़ने के लिए बधाई देते हुए ट्वीट किया।
उन्होंने ट्वीट में कहा, “आज कश्मीर शहीद दिवस के अवसर पर हम जम्मू एवं कश्मीर के अवैध और दमनकारी भारतीय कब्जे के खिलाफ चल रहे संघर्ष के लिए कश्मीर के लोगों को सलाम करते हैं। 13 जुलाई, 1931 के शहीद आज के कश्मीरी प्रतिरोध के पूर्वज हैं।”

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