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ग़ाजियाबाद

जुबान संभाल के (31-07-2020)

6 दिसंबर और अब 5 अगस्त इसे कहते हैं 56शुभ मुहूर्त

वैसे तो तलाशा उन पडिंतो को जाना चाहिये जिन्होने मार्च अप्रैल के महीने शादी के शुभ मुहूर्त बताये थे। लाक डाऊन लग गया और फेरे कैसिंल हो गये। लेकिन वो है तो मुमकिन हैं। जब फकीर ने कहा कि मुहूर्त की डेट ये ठीक हैं तो फिर संत की भला क्या ताकत कि डेट मुहूर्त को रांग बता दे। अब ऐसे में जिक्र भगवा कुर्ताधारियों में उस डेट को लेकर चल गया जब स्टेट और रीजनल ताजपोशी का एलान होना हैं। अब भगवा खेमें से ही आवाज आई कि पांच अगस्त से शुभ मुहूर्त कौन सा हो सकता है भला। जब मदिंर की र्इंट रखी जायेगी और वो भी उनके कर कमलो से तो कमल वाले कमले ही हो जायेगें कसम से। समझा दो स्टेट वालो को ही कि ये ही वो घड़ी है जब लगन मुहूर्त सब एकदम चकाचक मिलेगें। वो देवताओं के भी नेता हैं तो देवता फूल वर्षा करेगेंं। ये तारीख मुहूर्त तारीख के रूप में अमर होगी। पहले 6 थी अब 5 हो गई और देख लो 56 फिर मत कहना।

दरोगा के कान को छूकर निकली जब गोली

पुलिस पर हमले हो रहे हैं और बोली से लेकर गोली तक पुलिस निशाने पर हैं। महकमें में सीन अपनी सुरक्षा अपने हाथ यानी सेफ़टी के मामले में आत्मनिर्भर का चल रहा है। किस्सा महकमें वालो की जुबानी बाहर आया है। बदमाश को पुलिस वालो ने घेर लिया और यहां दरोगा जी शहीद हो जाते अगर सिपाही ने बहादुरी ना दिखाई होती। बदमाश की घेराबंदी करते ही उसने दरोगा की ठुडडी के पास पिस्टल सटा दी। सिपाही ने जाबांजी दिखाई और बदमाश को पीछे से दबोच लिया। गोली चल गई और दरोगा जी के गाल को लगभग टच करते हुये निकल गई। बदमाश कई वारदात वाला था और महकमा चाहता था कि गेम फिनिश का फरमान मिले। मगर सुलतान ए महकमा यहां महकमें के साथ नही आये। फिर जिस बदमाश ने दरोगा जी के फोटो पर माला चढ़ने और गार्ड आफ आनर के काम कर दिये थे उस बदमाश को तैमूर लंग बनाने से ही काम चलाना पड़ा। किस्सा महकमें में ये गूंज रहा है कि ऐसे तो कोई रिस्क ही नही लेगा आगे से अब

शकील ठेकेदार पर निगम की पूरी मेहरबानी

भाजपा वालो ने लाकडाऊन में मजदूरो को ढोने वाली बसो की फिटनेस चैक की थी। बात भाजपा पार्षद की जुबानी बाहर निकली और बताया गया कि एक बार निगम में कूड़े को ढोने वाली गाड़ियो की फिटनेस चैककरालो शकील वाली गाड़ी हो या सीएनजी वाला ई रिक्शा। कसम से गेम ऐसा है नियमो का तो बैडं ही बज गया हैं। बता दिया कि रब झूठ ना बुलाये गाड़िया थाने में बंद हैं और छूट ही नही सकती। कोर्ट कागज मांगेंगी और कागज तो कौवा ले गया वाला सीन हैं। फिटनेस मांग लो नये आरटीओ साहब तब पता चल जायेगा कि हो क्या रिया है ये निगम में। पुराने तो छोड़ो नये वाले भी नियमो में फंसे हुये है। उनका रजिस्ट्रेशन नही हो सकता है यदि ऐसा है तो फिर कूड़े वाले वाहनो की फिटनेस का सच क्या है मेयर को पता होगा और नगर निगम के अफसरों को पता होगा। भुगतान तो वो ही करेगे

मेयर जांच के लिये आदेश दे ही नही सकती हैं

वैसे तो भर्ती घोटाला निगम में कोई नई बात नही हैं। यहां तो फर्जी इंटरव्यू हो गये पहले भी। अब क्रांति मशाल पार्षद भर्ती वाली फाईल तलाश रहे हैं और वो भी अवलोकन करना चाहते हैं। बताने वाले ने उन्हे बता भी दिया कि फाईल तो पहले त्यागी जी के घर पर गई और वहां से बगंले पर पहुंच गई। सिग्नेचर को लेकर जंग शुरू हो गई। अब निगम वाले ने बताया कि मेयर इस मामले में निर्देश तो दे सकती है लेकिन आदेश नही दे सकती है पत्रावली के किस्से में चौब सिंह लिपिक और दिवंगत मेयर तेलूराम ने भी जांच के आदेश दे दिये थे। इस बात पर ही जांच मेरठ तक पहुंच गई थी। मेयर को जांच करानी है तो अफसर को निर्देश दे ना कि आदेश।

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