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झारखंड सरकार को जितना काम करना चाहिए, नहीं कर सकी : बाबूलाल

रांची। झारखंड के पहले मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी का कहना है कि कोरोना के संक्रमण दौर में झारखंड सरकार को जितना काम करना चाहिए था, वह नहीं कर सकी, वरना आज कोरोना संक्रमण का प्रभाव राज्य के सीमित क्षेत्रों में रहता। भाजपा विधायक दल के नेता मरांडी ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के आने का मामला हो या जरूरतमंदों को सहायता प्रदान करना मामला हो झारखंड सरकार सभी मोचरें पर विफल रही है। आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में मरांडी ने कहा कि राज्य में एक बड़ी आबादी के पास राशन कार्ड नहीं है। ऐसे लोग आज राशन तक को तरस रहे हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी उन तक नहीं पहुंच रही है।
बाबूलाल के अनुसार, ” राज्य में ऐसे लाखों हैं जिनका आवेदन देने के बाद भी कार्ड नहीं बन पाया है। ऐसे लोगों की संख्या 7 लाख बताई जा रही है। भारत सरकार के द्वारा अनाज मुहैया कराने के बाद भी इन वंचितों तक अनाज अब तक नहीं पहुंचना दुखद है। इक्के-दुक्के स्थानों को छोड़कर लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि राज्य में कोरोना का पहला मरीज राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में मिला था, अगर सरकार उसी समय कडाई से लॉकडाउन का पालन करवाई होती तो कोरोना का संक्रमण अन्य राज्यों में नहीं फैलता। आज सरकार हिंदपीढ़ी में केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती कर दी लेकिन अब सांप भाग जाने के बाद लाठी पीटने से क्या लाभ? उन्होंने कहा कि संक्रमण का कोई भी वाहक बन सकता है, लेकिन सरकार ने तब दिलचस्पी नहीं दिखाई।
मरांडी ने कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने को लेकर सरकार में कोई दिलचस्पी नहीं दिखती। मरांडी ने कहा कि आज प्रवासी मजदूरों के लौटने का सिलसिला जारी है, लेकिन जांच की गति काफी धीमी है, जिससे संक्रमितों की पहचान नहीं हो पा रही। उन्होंने कहा कि जिस राज्य से लोग ट्रेनों से लौट रहे हैं उस राज्य से झारखंड सरकार समन्वय नहीं बना सकी है।
झारखंड भाजपा विधायक दल के नेता मरांडी ने कहा कि आने वाले मजदूरों से पैसा वसूलने की बात आ रही है, सरकार को यह देखना चाहिए कि आखिर पैसा कौन वसूल रहा। कोरोना के इस दौर में भाजपा कहां खड़ी है सवाल के जवाब में मरांडी कहते हैं, “भाजपा की पूरी संगठन लोगों को राहत पहुंचाने में लगी हैं।उन्होंने कहा कि इस संक्रमण के दौर में पार्टी के विधायक, पदाधिकारी, कार्यकर्ता काम में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस राज्य के करीब 10 लाख लोग बाहर काम कर रहे है, इसमें से अगर आधी आबादी भी लौट जाती है, तो उनके सामने बेरोजगारी बड़ी समस्या होगी। सरकार को इसके लिए कदम उठाना चाहिए।
सरकार को सलाह दिए जाने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को चाहिए कि रोजगार सृजन के लिए लघु एवं मध्यम प्रकार के उद्योग-धंधे जल्द शुरू करायें, जिससे घर लौटे मजदूरों को काम मिल सके। रोजगार के अवर बढ़ाने की पहल करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि जांच केंद्रों की संख्या बढ़नी चाहिए, जिससे आने वाले सभी लोगों की जांच हो सके। अभी तो यही काम सरकार को करना चाहिए।

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