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बच्चे के मन को जानना बहुत जरूरी

नई दिल्‍ली(ईएमएस)। आजकल बेहद कम उम्र में ही बच्चे खाने के मामले में चूजी हो जाते हैं और फिर उन्हें पौष्टिक भोजन खिलाना बहुत मु‎श्किल हो जाता है । ‎जिसके कारण बच्चों की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, वहीं कई बार यही भोजन माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव की वजह भी बन जाता है। इसके ‎कारण पेरेंट्स को बच्चों से भोजन करवाने के लिए प्यार से पहले उनकी मनोवृत्ति समझना जरुरी हो गया है। हालां‎‎कि जब बच्चा छह-सात महीने का होता है, तो माताओं को लगता है कि बच्चे का पाचन तंत्र कमजोर है और वह उन्हें केवल दूध या दूध से बनी चीजें ही खिलाती हैं। जिसके कारण बच्चे का भोजन के प्रति स्वाद डेवलप नहीं होता और फिर वह बड़ा होकर भी हरी सब्जियां व अन्य पौष्टिक आहार खाने से कतराने लगता है। इसके बाद पेरेंट्स बच्चे को डॉक्टर से मिलकर आहार के बारे में पूछतें हैं और डॉक्टर की सलाह पर उसे कुछ ठोस आहार ‎खिलाने की सलाह देते हैं। इस दौरान एक सप्ताह तक एक ही चीज दें ताकि बच्चा उस चीज का स्वाद समझने लगे और फिर कुछ समय बाद दूसरी चीज दें। जिससे वह सब खाना सीखेगा। कुछ माता-पिता की आदत होती है कि वह बच्चे को खाना खिलाते समय टीवी चला देते हैं या फिर उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं। जिससे बच्चे का ध्यान स्क्रीन की तरफ ही रहता है और वह आराम से खाना खा लेते हैं। अभिभावकों को भले ही यह रास्ता आसान लगे लेकिन इससे बच्चे के भीतर गलत आदतों का संचार होता है। इस तरह अगर कभी आपके पास मोबाइल या टीवी नहीं होगा तो बच्चा खाना भी नहीं खाएगा और टीवी होने पर भी उसे न तो पेट भरने का अहसास होगा।

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