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भारतीय हॉकी दिग्गज मोहम्मद शाहिद का निधन

नई दिल्ली| ओलम्पिक स्वर्ण विजेता टीम के सदस्य रह चुके भारत के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद का बुधवार को लंबी बीमारी के कारण गुड़गांव के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 56 वर्ष के थे और काफी समय से किडनी और लीवर की परेशानी से जूझ रहे थे।
भारत के सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ियों में शुमार शाहिद, मॉस्को ओलम्पिक-1980 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। ओलम्पिक में भारत का यह आखिरी स्वर्ण पदक था।
पीलिया और डेंगू की चपेट में आने के कारण उनकी तबीयत और भी खराब हो गई थी। पेट दर्द की समस्या के कारण उन्हें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल में 29 जून को भर्ती कराया गया था।
लेकिन स्थिती में सुधार न होने के कारण उन्हें वाराणसी से गुड़गांव के मेदांता मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
शाहिद के परिवार में उनकी पत्नी प्रवीण शाहिद और दो बच्चे मोहम्मद सैफ और हीना शाहिद हैं।
उत्तर प्रदेश के शहर वाराणसी में 14 अप्रैल, 1960 को जन्मे शाहिद को मलेशिया में हुए चार देशों के टूर्नामेंट के दौरान लोकप्रियता हासिल हुई।
तीव्र गति से खेलने और गेंद को उतनी ही तेजी ड्रिबल करने में माहिर शाहिद ने 80 के दशक में भी हॉकी को लोकप्रिय बनाए रखा, जबकि भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा 1983 विश्व कप जीतने के बाद भारत में हॉकी की छवि धुंधली पड़ने लगी थी।
लेफ्ट मिडफील्ड क्षेत्र में एक अन्य दिग्गज जफर इकबाल के साथ शाहिद को जोड़ी बेहतरीन थी और वह मास्को ओलम्पिक-1980 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम के नायकों में से एक थे।
शाहिद ने 1985-86 सत्र में भारतीय हॉकी टीम की कमान भी संभाली और 1981 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार तथा 1986 में पद्मश्री से नवाजा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारतीय हॉकी के पूर्व कप्तान मोहम्मद शाहिद के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि देश ने एक प्रतिभाशाली खेल हस्ती को खो दिया।
सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ियो में से एक माने जाने वाले शाहिद को श्रद्धांजलि देते हुए मोदी ने कहा कि सरकार ने उन्हें बचाने की काफी कोशिश की थी।
मोदी ने ट्वीट किया, “शाहिद के असामयिक और दुर्भाग्यपूर्ण निधन के साथ ही भारत ने एक ऐसी प्रतिभाशाली खेल हस्ती खो दी, जो पूरे जोश और उत्साह के साथ खेलते थे।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन दुखद है कि हमारी प्रार्थनाएं भी उन्हें बचाने में असफल रहीं। शाहिद को नमन।”
हॉकी से संन्यास लेने के बाद शाहिद ने भारतीय रेलवे के साथ खेल अधिकारी के तौर पर काम किया और अपने गृहनगर वाराणसी में ही रहे।

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