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ब्रिटेन के नए यात्रा प्रतिबंधों को भारत ने बताया भेदभावपूर्ण, कहा कोविशील्ड को भी दी जाए मान्यता

नई दिल्ली। ब्रिटेन ने कोरोना के चलते यातायात नियमों में बदलाव किए हैं, लेकिन इसके साथ ही एक नया विवाद पैदा हो गया है। ब्रिटेन पर आरोप लग रहे हैं कि वह भारत के साथ भेदभाव कर रहा है। ब्रिटेन सरकार पर अब भारत से आने वाले यात्रियों के लिए तय नियमों समीक्षा करने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्रिटेन ने नए नियमों के तहत कोविशील्ड वैक्सीन लेने वाले लोगों को वैक्सीनेटेड नहीं माना जाएगा, जबकि ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका वैक्सीन लगवाने वाले लोगों को मान्यता दी गई है। ब्रिटेन की यात्रा के संबंध में फिलहाल लाल, एम्बर और हरे रंग की तीन अलग अलग सूचियां बनाई गई हैं।
खतरे के अनुसार अलग-अलग देशों को अलग अलग सूची में रखा गया है। अगर कोई देश रेड लिस्ट में है तो उससे आने वाले यात्री को ब्रिटेन पहुंचने के बाद 10 दिन होटल में क्वारंटीन रहना जरूरी है और यह अवधि खत्म होने से 2 दिन पहले उसे कोरोना जांच भी करानी होती है। जिन लोगों ने टीके की दोनों खुराक ले ली है, उन्हें भी यह नियम मानना पड़ता है। क्वारंटीन नियम का उल्लंघन करने पर 10 हजार पाउंड की पेनल्टी चुकानी पड़ती है। इसके अलावा यदि कोई यात्री नेगेटिव आरटीपीसीआर टेस्ट के बिना ब्रिटेन पहुंचता है तो उसपर 5 हजार पाउंड का जुर्माना लगाया जा सकता है। ब्रिटेन ने भारत को फिलहाल एंबर लिस्ट में रखा है। इसका अर्थ है कि यहां से जाने वाले यात्रियों को यात्रा से तीन दिन पहले कोविड-19 जांच करानी होगी। ऐसा नहीं करने की स्थिति में यात्री पर 500 पाउंड का जुर्माना लगाया जाएगा।
ब्रिटेन पहुंचने के दूसरे दिन यात्री को फिर से कोरोना जांच करवाना जरूरी है। यात्रा से पहले वाली जांच टीके की दोनों डोज ले चुके लोगों के लिए भी जरूरी है। बस राहत इतनी है कि उन्होंने ब्रिटेन में मान्यता प्राप्त वैक्सीन ली है, तो उन्हें क्वारंटीन नहीं होना पड़ेगा। ब्रिटेन में मॉडर्ना, फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन और ऐस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन को मंजूरी दी गई है। अगर ऐंबर लिस्ट में शामिल किसी देश के यात्री ने मान्यता प्राप्त वैक्सीन नहीं ली है तो उसे ब्रिटेन पहुंचने पर घर या फिर जहां वह रुकने वाला है, 10 दिनों के लिए क्वारंटीन होना जरूरी है और इस अवधि के खत्म होने से दो दिन पहले ही कोरोना जांच करानी होगी। ब्रिटेन ने ऐलान किया है कि चार अक्टूबर से अब उसकी सिर्फ एक रेड लिस्ट रहेगी यानी सभी सूचियों को मिला दिया जाएगा और केवल लाल सूची बाकी रहेगी। लाल सूची में शामिल देशों के यात्रियों को ब्रिटेन की यात्रा पर पाबंदियों का सामना करना पड़ेगा। जो देश रेड लिस्ट में नहीं होंगे, उनके लिए नियमों यात्री के वैक्सीनेशन स्टेटस पर निर्भर करेंगे।
ब्रिटेन ने जिन वैक्सीन को मान्यता दी है उनमें ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका, फाइजर बायोनटेक, मॉडर्ना या जैनसेन वैक्सीन शामिल हैं। इनके अलावा अगर किसी शख्स ने दो अलग-अलग वैक्सीन ली है, तो उन्हें भी मान्यता दी जाएगी। हालांकि, इन दोनों डोज का ऑक्सफोर्ड। फाइजर, मॉडर्ना में से किसी एक का होना जरूरी है। भारत में अधिकांश लोगों को कोविशील्ड टीका लगा है। यह ब्रिटेन के एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का ही भारतीय वर्जन है। इसे भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने बनाया है, इसके बावजूद भारत को सूची से बाहर रखा गया है।
ब्रिटेन में नेशनल इंडियन स्टूडेंट एंड एलुमनाई यूनियन (एआईएसएयू) की अध्यक्ष सनम अरोड़ा ने कहा भारतीय छात्र इस बात से परेशान हैं कि उन्हें लगता है कि यह एक भेदभावपूर्ण कदम है, क्योंकि अमेरिका और यूरोपीय संघ के उनके समकक्षों की तुलना में उनके साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है।

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