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आयकर विभाग छापों ने प्राइवेट लॉकर बिजनस की कमर तोड़ी, नोटबंदी के बाद लोग नहीं रखते ज्यादा कैश

मुंबई (ईएमएस)। प्राइवेट लॉकर और वॉल्ट का मामला पहले जैसा सुरक्षित नहीं रहा। दिल्ली और कोलकाता में प्राइवेट लॉकर्स और सेफ्टी वॉल्ट्स पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के छापों की वजह से संपत्ति को दुनिया की नजरों से छिपाकर रखने का बिजनस हिल गया है। वॉल्ट की सुविधा देने वाले दुनिया के बड़े प्लेयर्स ने जहां नो योर कस्टमर की प्रक्रिया तेज कर दी है, वहीं कई छोटे प्लेयर्स ने शटर हमेशा के लिए गिरा दिया है। मुंबई की एक वॉल्ट फर्म के प्रोपराइटर ने कहा, हमारे पास जो भी थोड़ा बिजनेस था, वह हाल में आईटी विभाग के छापे मारने से खत्म हो गया है। यह फर्म अगले छह महीनों में कारोबार खत्म करने योजना बना रही है। उन्होंने कहा, नोटबंदी के बाद ही प्राइवेट लॉकर बिजनेस ध्वस्त हो गया था। कारोबार अब ज्यादा कैश नहीं रख रहे हैं। इसके पहले इसी साल आईटी विभाग ने कोलकाता के वरदान मार्केट में एक वॉल्ट (600 से ज्यादा लॉकर वाला) पर छापा मारा था। वहां से एक करोड़ से ज्यादा की ज्वैलरी और कैश जब्त करने का दावा किया गया था दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में छह महीने पहले आईटी विभाग ने एक छापे में 25 करोड़ रुपये का कैश जब्त किया था। दोनों ही वॉल्ट में क्लाइंट्स की जानकारी उचित रूप से नहीं रखी गई थी, जिससे टैक्स अधिकारियों को यह पता लगाने में मुश्किल हुई कि किन लोगों ने वहां अपनी संपत्ति रखी थी।
महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात सहित कई राज्यों में लॉकर की सुविधा देने वाली नवकेतन लॉकर्स के डायरेक्टर पीयूष के डाक ने कहा, मुंबई में भी कुछ वॉल्ट्स हैं, जहां ग्राहक का केवाईसी रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखा जाता। उन्होंने कहा, ‘मामला लीगल हो तो मुझे इसकी चिंता नहीं रहती कि हमारे लॉकर्स में क्या रखा गया है। हालांकि एजेंसियां अगर हमारे पास आएं तो मेरे पास इतनी जानकारी होनी चाहिए कि मैं अपने ग्राहक से संपर्क कर सकूं। वॉल्ट ऑपरेटरों के अनुसार, प्राइवेट सेफकीपिंग का बिजनेस 2016 में नोटबंदी होने तक अच्छा चल रहा था। छोटे कारोबार और ट्रेडर, खासतौर से ज्वैलर्स और डायमंड ट्रेडर इनका ज्यादा उपयोग करते थे। हालांकि नोटबंदी के बाद यह ट्रेंड कमजोर पड़ गया। अमीर परिवार ज्वैलरी, दस्तावेज और कभी-कभी कैश रखने के लिए प्राइवेट लॉकर का उपयोग करते हैं। 1937 में शुरू हुई दिल्ली सेफ डिपॉजिट कंपनी के वीके गुप्ता ने कहा, इस इंडस्ट्री के लिए केवाईसी रूल्स कड़े करना होगा। उन्होंने कहा, इस इंडस्ट्री में कई अनऑर्गनाइज्ड प्लेयर हैं। इनमें से कुछ अपने ग्राहकों का रिकॉर्ड नहीं रखते हैं। इनकी वजह से पूरी इंडस्ट्री की बदनामी होती है। प्राइवेट लॉकर सर्विसेज चार मोर्चों पर बैंकों से ग्राहक छीनती हैं। ये आसानी से उपलब्ध हैं, इनमें वर्किंग आवर ज्यादा है, हॉलिडे कम हैं और बैंकों के मुकाबले इनकी सर्विस तेज है।

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