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एज फैक्टर अगर नहीं है कोई फैक्टर तो कन्सीडर हों भाजपा में ये नाम

पूरी उम्र उठाया है भाजपा का झंडा, मेयर दावेदारी में चलने चाहिए ये नाम

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। राजनीति में वरिष्ठता और अनुभव का अपना ही महत्व होता है। लेकिन ये भी सत्य है कि राजनीति में एक समय के बाद राजनीति बदलती है और यहां पर एज फैक्टर प्रमुख
होता है।
मेयर का पद ऐसा होता है जहां अनुभव और पार्टी के प्रति की गयी सेवाओं का भी मूल्यांकन होता है। भाजपा वैसे भी अपने वरिष्ठ नेताओं को सम्मान देती आई है। यदि मेयर चुनाव में एज कोई फैक्टर नहीं है तो फिर इस बार उसे उन नामों पर भी कन्सीडर करना चाहिए जिन्होंने अपनी लाईफ भाजपा का झंडा उठाने में बिताई है। ये चर्चा भाजपा के बीच है और वरिष्ठ लॉबी ये मानती है कि यहां पर टिकट का मानक वरिष्ठता और पार्टी के प्रति समर्पण निष्ठा होना चाहिए। तेलूराम काम्बोज के टिकट से भाजपा ने निष्ठा और समर्पण के ईनाम की शुरूआत की थी। ये भाजपा है जिसने अपने लाईफ टाईम कार्यकर्ता के रूप में एक पत्रकार और एक उम्रदराज व्यक्ति को मेयर का टिकट दिया था। ये सम्मान था और घमासान के बाद भाजपा इसे बचाने में कामयाब रही थी। भाजपा में चर्चा है कि अगर बूथ पर यूथ है तो उस कार्यकर्ता के बारे में भी पार्टी विचार करे जिसने अपनी यूथ लाईफ ही भाजपा में बिताई है। जिन नेताओं ने पार्टी को अपना जीवन दिया है उन नेताओं के बारे में पार्टी विचार करे। वरिष्ठ नेता तेलूराम काम्बोज ने भी मेयर के रूप में सदन चलाया। अब ये सवाल है कि यदि पार्टी एज फैक्टर को दरकिनार करती है तो यहां पर जगदीश साधना को उम्मीदवार बनाने में क्या दिक्कत है। वो उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के सदस्य रहे हैं और जहां तक सवाल सक्रियता का है तो वो पार्टी के धरनों से लेकर कार्यक्रमों तक मौजूद रहते हैं। बीते दिनों अपनी उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने खुद को सक्रिय राजनीति से दूर किया है। लेकिन वो पूरी तरह सक्रिय हैं। पंजाबी समाज का ये अनुभवी वरिष्ठ भाजपा नेता मेयर पद के लिए काबिल उम्मीदवार हो सकते हैं। यदि अनुभव, शैक्षिक योग्यता और सामाजिक प्रोफाइल को देखा जाए तो यहां पर भाजपा के पृथ्वी सिंह की दावेदारी भी बनती है। पृथ्वी सिंह विधानसभा के दावेदार रहे हंै। प्रदेश स्तर के नेताओं में गिनती होती है। भाजपा के थिंक टैंक वाले नेता माने जाते हैं और अपनी बात को बेहद करीने से रखते हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता हैं और बेहतर उम्मीदवार हो सकते हैं।
विजय मोहन तो अभी उम्र दराज भी नहीं हैं और उन्हें भी निगम का एनसाईक्लोपीडिया कहा जाता है। निगम के कामकाज से वाकिफ हैं। भाजपा के वफादार झंडाबरदार हैं। मेयर वाली दावेदारी में ये नाम भी कार्यकर्ता का सम्मान हो सकता है। यदि कार्यकर्ता की बात करें तो पूर्व जिलाध्यक्ष मास्टर अमरदत्त शर्मा एक बेहतर उम्मीदवार हो सकते हैं। लाईफ टाईम भाजपाई हैं और भले ही कुछ नहीं मिला लेकिन वो फिर भी संतुष्ट और सच्चे भाजपाई हैं। वरिष्ठता की बात करें और उम्र के हिसाब से सक्रियता की बात करें तो बलदेवराज शर्मा इस फ्रेम में पूरी तरह फिट होते हैं। उम्रदराज भी हैं और पार्टी के सभी कार्यक्रमों सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। पार्टी ने उन्हें दर्जाप्राप्त राज्यमंत्री बनाया लेकिन मेयर के रूप में भी ये लाईफ टाईम भाजपाई चेहरा पारी खेल सकता है। लाईफ टाईम भाजपाई और दर्जाप्राप्त राज्यमंत्री वाले फ्रेम में अशोक गोयल भी आते हैं।
यदि कार्यकर्ता फैक्टर तथा लाईफ टाईम भाजपाई को मेयर वाले फ्रेम में लिया जाये तो यहां लाईनपार के देशराज देशी वो चेहरा हैं जिन्हें पार्टी मेयर टिकट दे सकती है। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं और यदि उन्हें मौका दिया जाये तो वो फूल भी खिला सकते हैं।

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