जाधव पर आईसीजे का फैसला पाकिस्तान नहीं माना तो केस जाएगा यूएन

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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव पर अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) का फैसला आने के बाद जहां पाक की पोल खुल गई वहीं अब लोगों के मन में सवाल है कि क्या आईसीजे का फैसला मानने के लिए कोई देश मजबूर हैं? जवाब है कि खासतौर पर जाधव के मामले में सैद्धांतिक तौर पर पाकिस्तान आईसीजे के फैसले को मानने के लिए बाध्यकारी होगा। क्योंकि भारत की अपील वियना संधि के आधार पर की गई है। इस संधि पर पाकिस्तान ने हस्ताक्षर किए हैं। या कहें जिन देशों ने इस संधि पर साइन किए हैं वे आईसीजे के फैसले को मानने के लिए बाध्य हैं। इस बीच, पाकिस्तान ने कुछ ऐसे संकेत दिए हैं जिससे माना जा रहा है कि यह मामला संयुक्त राष्ट्र (यूएन) तक जा सकता है। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने आईसीजे के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह वह कानून के आधार पर इस मामले में आगे बढ़ेंगे। लेकिन कुछ ऐसे भी उदाहरण हैं, जिसमें देशों ने आईसीजे के फैसले को नहीं माना। एक बार अमेरिकी कोर्ट ने मैक्सिको के 51 नागरिकों को दोषी मानकर सजा सुनाई थी। मैक्सिको आईसीजे पहुंच गया। 2004 में आईसीजे ने अमेरिका के खिलाफ फैसला सुनाया। लेकिन अमेरिका ने फैसले को नहीं माना और कहा कि हमारे राष्ट्रीय कानूनों को कोई किनारे नहीं कर सकता।
पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने आज ट्वीट कर कहा, ‘कुलभूषण जाधव को रिहा नहीं करने के आईसीजे के फैसले का स्वागत करता हूं। हम इस मामले में कानून के तहत आगे बढ़ेंगे।’ कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि देश मजबूर नहीं हैं कि आईसीजे के फैसले को मानें। अगर कोई देश फैसला मानने से इनकार करता है तो फिर यूएन की सुरक्षा परिषद का रोल अहम हो जाता है। फिर मामले में वोटिंग होती है। ऐसे में केवल सुरक्षा परिषद पाकिस्तान को फैसला मानने के लिए मजबूर कर सकती है। लेकिन परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में चीन भी है, जो पाकिस्तान का साथ दे सकता है। मालूम हो कि आतंकी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के मामले में चीन ने भारत को लंबा इंतजार करवाया था।
पाकिस्तान ने कहा कि वह कुलभूषण जाधव मामले में ‘कानून के अनुसार’ आगे बढ़ेगा। पाकिस्तान ने यह बात आईसीजे के फैसले के बाद कही कि पाकिस्तान को भारतीय नागरिक की मौत की सजा की समीक्षा करनी चाहिए, जिसे पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने उक्त सजा ‘जासूसी और आतंकवाद’ के आरोप में सुनाई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के एक ‘जिम्मेदार सदस्य’ के रूप में पाकिस्तान ने बहुत कम समय के नोटिस के बावजूद सुनवाई के लिए अदालत में पेश हुआ। अब फैसला सुनने के बाद पाकिस्तान अब कानून के अनुसार आगे बढ़ेगा।’ पाकिस्तान ने कहा, ‘आईसीजे ने अपने फैसले में जाधव को बरी या रिहा करने की भारत की अर्जी स्वीकार नहीं की।’