मानवता हो रही है तार-तार

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देश की राजधानी दिल्ली में वर्ष-2013 में हुए रेपकांड के बाद समूचे देश में एक अलख जगी थी और महिला की सुरक्षा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल की गई थी। केंद्र सरकार की ओर से महिलाओं को सुरक्षित रखने की दिशा में उठाये गये प्रभावी कदमों के बावजूद भी इस ओर रोकथाम लगती हुई नजर नही आ रही है। कई मर्तबा देखने को मिला कि किसी लड़की को हवस के दरिंदों ने अपना शिकार बना डाला तो कई मासूमों को भी इस बीच हवस का शिकार होना पड़ा है। दिल्ली ही नहीं देश के अन्य प्रान्तों में भी देखने को मिला कि छोटी छोटी बच्चियों को हवस का शिकार बनाया गया। निरंतर सामने आ रही इन घटनाओं ने मानवता को भी शर्मशार करने का काम किया है। अभी दिल्ली में एक चार वर्ष की मासूम के साथ बलात्कार किये जाने की घटना सामने आई है। मासूम के साथ जो कुछ हुआ उससे स्वस्थ समाज को एक बार फिर से आईना दिखाने का काम किया। सवाल यह उठता है कि आखिर देश में होने वाले बलात्कारों पर रोकथाम क्यों नही लग पा रही है, आखिर सरकारी मशीनरी में कहा पर कमी है जो इस गंभीर मुद्दे पर कमजोर नजर आ रही है। देश के लोगों को अब इस ओर प्रभावी कदम उठाने होंगे, तभी जाकर ऐसे घिनौनी वारदातों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। हर उस व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी भली भॉति समझनी होगी जो समाज में उंचे पदों पर बैठे हुए हैं। किसी लड़की के साथ जब रेप की वारदात होती है तो उसका जमीर मर जाता है, सोचिए जब किसी मासूम के साथ ऐसा कृत्य होता है तो उसे तो यह भी मालूम नहीं होता आखिर उसके साथ क्या हुआ है। समाज के जिम्मेदार लोगों को इस गंभीर विषय पर एकमत होकर सामने आना होगा और ऐसे मामलों में जिसकी संलिप्ता सामने आये उसका सामाजिक बहिष्कार के साथ उसे कठोर से कठोर दण्ड भी दिया जाये। समाज किस रास्ते पर जा रहा है इसके बारे में भी लोगों को अब समझना होगा, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब ऐसे कृत्यों को अंजाम देने वाले लोग बेखोफ होकर घूमेंगे और ना जाने कितनी मासूम बच्चियों को हवस का शिकार बनाया जाता रहेगा। दिल्ली में जो हुआ वह किसी भी मायनों में सही नहीं हुआ, बच्ची के साथ कुकृत्य करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये, और केंद्र सरकार को इस ओर गंभीरता से कड़ा कानून बनाना चाहिए, ताकि ऐसे मामलों की पूर्णरूप से रोकथाम हो सके। धन्यवाद! मनोज गुप्ता