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विदेश

बांग्लादेश ने इस्कॉन के 54 सदस्यों को भारत आने से रोका

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ढाका, 1 दिसंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में पुलिस ने रविवार को भारत जाने की कोशिश कर रहे अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के 54 सदस्यों को बेनापोल सीमा चौकी से वापस भेज दिया। हालांकि, उनके पास वैध यात्रा दस्तावेज थे।

मीडिया के अनुसार, बांग्लादेश पुलिस ने ‘संदिग्ध यात्रा’ का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी। कुछ लोगों ने तो यह भी दावा किया कि सीमा पर पहुंचने वाले हिंदुओं की कुल संख्या 70 से ज्यादा थी।

जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों से हिंदू श्रद्धालु शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित भूमि बंदरगाह पर पहुंचे थे। वे बेनापोल-पेट्रापोल क्रॉसिंग के माध्यम से भारत जाना चाहते थे।

बांग्लादेश के अंग्रेजी दैनिक डेली स्टार ने बेनापोल इमिग्रेशन चेकपोस्ट के प्रभारी अधिकारी इम्तियाज अहसानुल कादर भुइया के हवाले से कहा, “हमने पुलिस की विशेष शाखा से परामर्श किया और उच्च अधिकारियों से उन्हें अनुमति नहीं देने के आदेश मिले।”

प्रभारी अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस्कॉन के 54 सदस्यों को ‘उनके यात्रा उद्देश्यों के संबंध में संदेह’ के कारण भारत में प्रवेश की इजाजत नहीं दी।

समूह के कई सदस्यों को शनिवार रात से सीमा चौकी पर इंतजार करने के लिए कहा गया था। उन्होंने बताया कि वे वैध पासपोर्ट और वीजा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भारत जा रहे थे, लेकिन रविवार को उन्हें वापस भेज दिया गया। अधिकारियों ने इस कदम का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

इस्कॉन के सदस्यों में से एक सौरभ तपंदर चेली ने मीडिया को बताया, “हम भारत में एक धार्मिक समारोह में हिस्सा लेने जा रहे थे, लेकिन इमिग्रेशन अधिकारियों ने सरकारी अनुमति न होने का हवाला देते हुए हमें रोक दिया।”

भारत की तरफ पेट्रापोल में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) का उद्घाटन जुलाई 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने संयुक्त रूप से किया था।

बांग्लादेश में मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन के बाद से अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा गंभीर हमले हो रहे हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत में, बांगलादेश सम्मिलित सनातन जागरण जोत के प्रवक्ता और इस्कॉन बांगलादेश से जुड़े चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद देश में अल्पसंख्यकों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आगजनी, लूटपाट, चोरी, तोड़फोड़ और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं तथा मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले सामने आए हैं।

–आईएएनएस

एफजेड/एकेजे

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आतंकवादी से बंदूक छीनने वाले की हो रही है खूब तारीफ, बहादुरी ने बचाई कई जानें

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नई दिल्ली। करंट क्राइम। सिडनी के बोंडी बीच पर हुए खौफनाक आतंकी हमले के बीच एक आम नागरिक ने अपनी जान पर खेलकर हमलावर से राइफल छीन ली। मौत के तांडव के बीच इस जांबाज की बहादुरी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसकी तारीफ ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री से लेकर पूरी दुनिया कर रही है।
ऑस्ट्रेलिया के मशहूर बोंडी बीच पर यहूदी त्योहार के जश्न के दौरान मौत का तांडव देखने को मिला। गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच 15 बेगुनाहों की जान चली गई। लेकिन इस खौफनाक मंजर के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। एक निहत्थे शख्स ने अपनी जान की परवाह किए बिना मौत की आंखों में आंखें डालीं और एक हथियारबंद आतंकी को धर दबोचा। अब इस शख्‍स को हीरो कहा जा रहा है। इस शख्‍स का नाम अहमद अल-अहमद है। 43 साल के अहमद दो बच्चों के पिता हैं और फलों की दुकान चलाते हैं। वहां मौजूद दूसरे आतंकवादी ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें दो गोलियां मार दीं। फिलहाल अहमद का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
और राहत की बात यह है कि उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है और उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद है।
वीडियो में साफ दिखता है कि सफेद शर्ट पहने एक शख्स, राइफल ताने खड़े आतंकी (काले कपड़ों में) की ओर दौड़ता है। वह पीछे से चीते की फुर्ती से उस पर झपटता है और हाथापाई करते हुए अपने नंगे हाथों से आतंकी से राइफल छीन लेता है। वीरता की हद देखिए, बंदूक छीनते ही वह उसे वापस उसी आतंकी पर तान देता है। वीडियो के अगले हिस्से में दिखता है कि अपना हथियार छिन जाने के बाद हमलावर लड़खड़ाता है और पीछे हटते हुए एक पुल की ओर भागता है, जहां कथित तौर पर एक दूसरा शूटर मौजूद था। इस बीच, वह बहादुर राहगीर स्थिति को संभालते हुए बंदूक को जमीन पर रख देता है। रॉयटर्स ने पुष्टि की है कि वीडियो वास्तविक है और इसमें दिख रहे सशस्त्र व्यक्ति वही हैं जिन्हें बाद में पुलिस कार्रवाई के दौरान देखा गया था।

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सिडनी के बोंडी बीच पर हमला करने वाले पाकिस्तानी बाप बेटे थे, अब तक 15 की मौत

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नई दिल्ली। करंट क्राइम। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर गोलीबारी में मरने वालों की संख्या 15 तक पहुंच गई है। इस बीच जांच में सामने आया कि पाकिस्तान मूल के बाप और बेटे ने इस घटना का अंजाम दिया है। उन्होंने बोंडी बीच पर एक यहूदी त्योहार की तैयारी के दौरान लोगों पर गोलियां बरसाईं। लोगों पर गोलियां बरसाने वाले दो बंदूकधारी पिता-पुत्र थे। वहीं, हमलावर की मां ने कहा कि मेरा बेटा ऐसा कर ही नहीं सकता है।
हमले को लेकर न्यू साउथ वेल्स के पुलिस आयुक्त माल लैन्योन ने बताया कि 50 साल के बंदूकधारी साजिद अकरम को पुलिस ने मार गिराया। वहीं, उसके पुत्र 24 साल के नवीद अकरम घायल हो गया और उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
जांच से जुड़े अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के हवाले से बताया कि दोनों पाकिस्तानी नागरिक थे। अकरम के न्यू साउथ वेल्स स्थित ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
वहीं, पुलिस ने घटना के बाद नवीद की मां वेरेना से भी पूछताछ की है। हमलावर की मां का कहना है कि उसका बेटा ऐसा हमला कर ही नहीं सकता है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने हाल ही में राजमिस्त्री के रूप में अपनी नौकरी खो दी थी और गोलीबारी से कुछ घंटे पहले ही उसने परिवार से आखिरी बार बात की थी।
हमलावर की मां का कहना है कि बेटे ने मुझे रविवार को फोन किया और कहा कि मैं अभी तैरने गया था। मैंने स्कूबा डाइविंग की। उन्होंने कहा कि नवीद बहुत अच्छा लड़का है और हर कोई मेरे बेटे जैसा बेटा ही चाहेगा।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सिडनी का बोंडी बीच काफी प्रसिद्ध है, जो रविवार को लोगों से खचाखच भरा हुआ था। हमलावरों ने करीब 10 मिनट तक गोलियां चलाईं। इससे सैकड़ों लोग रेत पर और आस-पास की सड़कों पर इधर-उधर भागने लगे। पुलिस का कहना है कि लक्षित हनुक्का कार्यक्रम में लगभग 1,000 लोग शामिल हुए थे, जो समुद्र तट के पास एक छोटे से पार्क में आयोजित किया गया था।

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बांग्लादेश के पूर्व सेना अधिकारी ने भारत के खिलाफ उगला जहर, कहा-जब तक भारत के टुकडे नहीं होंगे, तब तक हमारी शांति नहीं आएगी

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नई दिल्ली। करंट क्राइम। बांग्लादेश के एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल ने भारत को टुकडे-टुकडे करने की बात की है। रिटायर ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्लाहिल अमान आजमी का भारत विरोध का पुराना इतिहास रहा है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की तरह भारत को लेकर खतरनाक सपने देख रहे हैं। बांग्लादेश की सेना से रिटायर ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्लाहिल अमान आज़मी ने कहा कि जब तक भारत के टुकड़े टुकड़े नहीं हो जाते हैं बांग्लादेश में संपूर्ण शांति स्थापित नहीं हो सकती है। बांग्लादेश की सेना में लंबे समय तक काम कर चुका जनरल आजमी 1971 में युद्ध अपराध का दोषी ठहराया जा चुका जमात-ए-इस्लामी के नेता गुलाम आजम का बेटा है।
एक वीडियो में अब्दुल्लाहिल अमान आजमी कहता है कि, ’भारत जब तक टुकड़े-टुकड़े नहीं हो जाएगा, कयामत तक वह बांग्लादेश को शांतिपूर्वक रहने नहीं देगा। हमारे देश की मीडिया, हमारी सांस्कृतिक दुनिया, हमारे बुद्धिजीवियों के संसार में हर जगह भारत दखल देता है। पानी के मुद्दे पर जो लोग हमारे लिए अड़चन पैदा कर रहे हैं, हमारे लोगों को जिस तरह मारा जा रहा है, फिर व्यापारिक असमानता भी है।
बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद इसी शख्स ने बांग्लादेश के राष्ट्रगान और संविधान को बदलने की मांग की थी।

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