विदेश
अफगानिस्तान : कोयला खदान में बड़ा हादसा, 35 खनिक मलबे में फंसे
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आयबक, 15 दिसंबर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के समांगन प्रांत में एक कोयला खदान के मलबे में कई खनिक फंस गए हैं। स्थानीय अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, प्रांतीय स्वास्थ्य निदेशक सईद उस्मान हामिदी ने मलबे के नीचे 35 खनिकों के फंसे होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि बचाव दल और स्वास्थ्य कर्मियों को क्षेत्र में भेज दिया गया है।
प्रांतीय पुलिस कार्यालय की ओर से रविवार को जारी एक बयान में कहा गया, “शुरूआती रिपोर्टों से पता चलता है कि समांगन प्रांत के दारा-ए-सूफी पायिन जिले में कल मजदूर कोयला खदान में काम कर रहे थे, लेकिन खदान का एक हिस्सा ढह गया, जिसके परिणामस्वरूप कई खनिक मलबे में फंस गए।”
बयान में आगे कहा गया कि पुलिसकर्मी, स्थानीय अधिकारी और ग्रामीण मलबे में फंसे खनिकों को बचाने के लिए घटनास्थल पर पहुंच गए हैं।
स्थानीय तालिबान अधिकारियों के अनुसार, मलबे में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए बचाव अभियान जारी है, लेकिन अभी तक किसी को भी मुक्त नहीं कराया जा सका है।
बख्तर न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह घटना शनिवार शाम 6 बजे के आसपास हुई।
इस सप्ताह की शुरुआत में बामियान प्रांत के ख्वाजा गंज गांव में एक कोयला खदान में गैस के संपर्क में आने से दो मजदूरों की मौत हो गई थी।
फरवरी 2002 में, अफगानिस्तान में एक कोयला खदान के ढहने से कम से कम 10 खनिकों की जान चली गई थी।
2019 में अफ़गानिस्तान में एक सोने की खदान के ढहने से कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी। यह धमाका बदख्शां प्रांत के कोहिस्तान जिले में हुआ था।
अफगानिस्तान में खनिजों के विशाल संसाधन हैं, लेकिन कई खदानें पुरानी हैं और उनका रखरखाव ठीक से नहीं किया जाता है।
अफगानिस्तान के खनन क्षेत्र में घातक दुर्घटनाएं अक्सर होती हैं। इन घटनाओं के कारण अक्सर अपर्याप्त सुरक्षा उपाय और उचित उपकरणों की कमी होती है।
–आईएएनएस
एमके/
विदेश
आतंकवादी से बंदूक छीनने वाले की हो रही है खूब तारीफ, बहादुरी ने बचाई कई जानें
नई दिल्ली। करंट क्राइम। सिडनी के बोंडी बीच पर हुए खौफनाक आतंकी हमले के बीच एक आम नागरिक ने अपनी जान पर खेलकर हमलावर से राइफल छीन ली। मौत के तांडव के बीच इस जांबाज की बहादुरी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसकी तारीफ ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री से लेकर पूरी दुनिया कर रही है।
ऑस्ट्रेलिया के मशहूर बोंडी बीच पर यहूदी त्योहार के जश्न के दौरान मौत का तांडव देखने को मिला। गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच 15 बेगुनाहों की जान चली गई। लेकिन इस खौफनाक मंजर के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। एक निहत्थे शख्स ने अपनी जान की परवाह किए बिना मौत की आंखों में आंखें डालीं और एक हथियारबंद आतंकी को धर दबोचा। अब इस शख्स को हीरो कहा जा रहा है। इस शख्स का नाम अहमद अल-अहमद है। 43 साल के अहमद दो बच्चों के पिता हैं और फलों की दुकान चलाते हैं। वहां मौजूद दूसरे आतंकवादी ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें दो गोलियां मार दीं। फिलहाल अहमद का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
और राहत की बात यह है कि उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है और उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद है।
वीडियो में साफ दिखता है कि सफेद शर्ट पहने एक शख्स, राइफल ताने खड़े आतंकी (काले कपड़ों में) की ओर दौड़ता है। वह पीछे से चीते की फुर्ती से उस पर झपटता है और हाथापाई करते हुए अपने नंगे हाथों से आतंकी से राइफल छीन लेता है। वीरता की हद देखिए, बंदूक छीनते ही वह उसे वापस उसी आतंकी पर तान देता है। वीडियो के अगले हिस्से में दिखता है कि अपना हथियार छिन जाने के बाद हमलावर लड़खड़ाता है और पीछे हटते हुए एक पुल की ओर भागता है, जहां कथित तौर पर एक दूसरा शूटर मौजूद था। इस बीच, वह बहादुर राहगीर स्थिति को संभालते हुए बंदूक को जमीन पर रख देता है। रॉयटर्स ने पुष्टि की है कि वीडियो वास्तविक है और इसमें दिख रहे सशस्त्र व्यक्ति वही हैं जिन्हें बाद में पुलिस कार्रवाई के दौरान देखा गया था।
विदेश
सिडनी के बोंडी बीच पर हमला करने वाले पाकिस्तानी बाप बेटे थे, अब तक 15 की मौत
नई दिल्ली। करंट क्राइम। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर गोलीबारी में मरने वालों की संख्या 15 तक पहुंच गई है। इस बीच जांच में सामने आया कि पाकिस्तान मूल के बाप और बेटे ने इस घटना का अंजाम दिया है। उन्होंने बोंडी बीच पर एक यहूदी त्योहार की तैयारी के दौरान लोगों पर गोलियां बरसाईं। लोगों पर गोलियां बरसाने वाले दो बंदूकधारी पिता-पुत्र थे। वहीं, हमलावर की मां ने कहा कि मेरा बेटा ऐसा कर ही नहीं सकता है।
हमले को लेकर न्यू साउथ वेल्स के पुलिस आयुक्त माल लैन्योन ने बताया कि 50 साल के बंदूकधारी साजिद अकरम को पुलिस ने मार गिराया। वहीं, उसके पुत्र 24 साल के नवीद अकरम घायल हो गया और उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
जांच से जुड़े अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के हवाले से बताया कि दोनों पाकिस्तानी नागरिक थे। अकरम के न्यू साउथ वेल्स स्थित ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
वहीं, पुलिस ने घटना के बाद नवीद की मां वेरेना से भी पूछताछ की है। हमलावर की मां का कहना है कि उसका बेटा ऐसा हमला कर ही नहीं सकता है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने हाल ही में राजमिस्त्री के रूप में अपनी नौकरी खो दी थी और गोलीबारी से कुछ घंटे पहले ही उसने परिवार से आखिरी बार बात की थी।
हमलावर की मां का कहना है कि बेटे ने मुझे रविवार को फोन किया और कहा कि मैं अभी तैरने गया था। मैंने स्कूबा डाइविंग की। उन्होंने कहा कि नवीद बहुत अच्छा लड़का है और हर कोई मेरे बेटे जैसा बेटा ही चाहेगा।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सिडनी का बोंडी बीच काफी प्रसिद्ध है, जो रविवार को लोगों से खचाखच भरा हुआ था। हमलावरों ने करीब 10 मिनट तक गोलियां चलाईं। इससे सैकड़ों लोग रेत पर और आस-पास की सड़कों पर इधर-उधर भागने लगे। पुलिस का कहना है कि लक्षित हनुक्का कार्यक्रम में लगभग 1,000 लोग शामिल हुए थे, जो समुद्र तट के पास एक छोटे से पार्क में आयोजित किया गया था।
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बांग्लादेश के पूर्व सेना अधिकारी ने भारत के खिलाफ उगला जहर, कहा-जब तक भारत के टुकडे नहीं होंगे, तब तक हमारी शांति नहीं आएगी
नई दिल्ली। करंट क्राइम। बांग्लादेश के एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल ने भारत को टुकडे-टुकडे करने की बात की है। रिटायर ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्लाहिल अमान आजमी का भारत विरोध का पुराना इतिहास रहा है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की तरह भारत को लेकर खतरनाक सपने देख रहे हैं। बांग्लादेश की सेना से रिटायर ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्लाहिल अमान आज़मी ने कहा कि जब तक भारत के टुकड़े टुकड़े नहीं हो जाते हैं बांग्लादेश में संपूर्ण शांति स्थापित नहीं हो सकती है। बांग्लादेश की सेना में लंबे समय तक काम कर चुका जनरल आजमी 1971 में युद्ध अपराध का दोषी ठहराया जा चुका जमात-ए-इस्लामी के नेता गुलाम आजम का बेटा है।
एक वीडियो में अब्दुल्लाहिल अमान आजमी कहता है कि, ’भारत जब तक टुकड़े-टुकड़े नहीं हो जाएगा, कयामत तक वह बांग्लादेश को शांतिपूर्वक रहने नहीं देगा। हमारे देश की मीडिया, हमारी सांस्कृतिक दुनिया, हमारे बुद्धिजीवियों के संसार में हर जगह भारत दखल देता है। पानी के मुद्दे पर जो लोग हमारे लिए अड़चन पैदा कर रहे हैं, हमारे लोगों को जिस तरह मारा जा रहा है, फिर व्यापारिक असमानता भी है।
बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद इसी शख्स ने बांग्लादेश के राष्ट्रगान और संविधान को बदलने की मांग की थी।
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