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इधर दिया प्राइवेट स्कूलों की संस्था ने पांच लाख रुपए का दान

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। इन दिनों लॉकडाउन अवधि में फीस माफी का मुद्दा जोर पकड़ रहा है और यहां सबसे बड़ी बात यह है कि पूरा सीन ही भाजपा बनाम भाजपा चल रहा है। विपक्ष को जनता के इस मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन भाजपा का एक वर्ग फीस माफी की मांग कर रहा है तो दूसरा वर्ग फीस लेने पर अडिग है। स्कूल-कॉलेज भी भाजपा के हैं और अपील भी भाजपा की ओर से है। अभिभावक समिति का मोर्चा भी भाजपा नेता ने खोला है।
लोकसभा सांसद जनरल वीके सिंह और भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा की फीस माफी की अपील पर स्कूल मालिकों ने कोई ध्यान नहीं दिया था। एक तरह से उन्होंने जनरल वीके सिंह और भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा की अपील को इग्नोर कर दिया। यह तर्क दिया कि हमारे पास स्टाफ को सैलेरी देने के लिए पैसे इसी फीस से आएंगे। लेकिन कमाल तब हो गया जब निजी स्कूलों की संस्था इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ने शुक्रवार को प्रदेश के चिकित्सा मंत्री व शहर विधायक अतुल गर्ग को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए पांच लाख रुपए का चेक दिया। संस्था के अध्यक्ष सुभाष जैन के नेतृत्व में महामंत्री गुलशन भांबरी, जेके गौड़ व आलोक गर्ग ने राज्यमंत्री अतुल गर्ग के कविनगर स्थित आवास पर मुलाकात की और पांच लाख रुपए का चेक सौंपा। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में भी आवश्यकता पड़ी तो फेडरेशन हर संभव सहयोग करने के लिए वचनबद्ध है। अब यहां पर उल्लेखनीय यह है कि इस फेडरेशन के अध्यक्ष सुभाष जैन सिल्वर लाइन प्रेस्टिज स्कूल के मालिक हैं और महामंत्री गुलशन भांबरी विजयनगर स्थित एसएसके पब्लिक स्कूल के मालिक हैं और राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल के सांसद प्रतिनिधि हैं। जेके गौड़ जेकेजी इंटरनेशनल स्कूल के मालिक हैं। आलोक गर्ग रामकिशन इंस्टीट्यूट के मालिक हैं। कनेक्शन पूरा भाजपाई है। जब इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ने यह चेक दिया तो आॅल पेरेंट्स एसोसिएशन मैदान में आ गई और उसने स्कूल फेडरेशन को सवाल उठाते हुए घेर लिया। आॅल पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष शिवानी जैन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सभी अभिभावकों को बधाई और धन्यवाद और स्कूल के चेयरपर्सन को भी।
जिन्होंने अभिभावकों के पैसों को राहत कोष में देकर अभिभावकों का गौरव बढ़ाया। क्योंकि स्कूल की कमाई अभिभावक से ही होती है। मामला यहीं नहीं रुका और शिवानी जैन से इस ट्वीट को सीएम आॅफिस यूपी और अतुल गर्ग बीजेपी और एमयोगीआदित्यनाथ को टैग किया। इसके बाद संस्था के महासचिव सचिन सोनी ने इस पांच लाख के चेक पर लिखा कि बेवजह का सवाल करते हैं कि यदि पेरेंट्स फीस नहीं देंगे तो टीची और स्टाफ की सैलेरी कहां से दी जाएगी। ये उन सभी का जवाब है पेरेंट्स का इतना रुपया तो स्कूल के पास रिजर्व फंड में है जो कि टीचर और स्टाफ की सैलेरी दे सकते हैं। सचिन सोनी ने अपने ट्वीट को डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक सहित कई अन्य को भी टैग किया। यहां पर बताया गया कि गाजियाबाद के अभिभावकों ने इतिहास रचा है। आपदा की घड़ी में पांच लाख रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए हैं। खुद आर्थिक संकट से गुजरने के बावजूद देश पर मंडराते संकट को प्राथमिकता दी है। यह भी लिखा कि क्या अभिभावकों की परेशानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरपी निशंक अब भी नहीं समझेंगे। एपीए ने सवाल उठाया कि जब अभिभावकों के पैसे से सरकार की मदद हो सकती है तो फिर फीस भी माफ की जा सकती है।

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