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भारत में बढ़ेगी गर्मी, गहराएगा बाढ़ का संकट

नई दिल्ली। मानसून शुरू होते ही असम में बाढ़ आ गई है, यह सब जलवायु परिवर्तन का असर है। भारत के अलग-अलग राज्यों में तीव्र बारिश के दिन बढऩे से बाढ़ जैसे हालात में और तेजी आएगी। हाल ही में भारत में जलवायु परिवर्तन पर प्रकाशित पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय मौसम में गर्मी बढऩे के साथ ही कम समय में तेज बारिश बढ़ेगी और बाढ़ जैसे हालात लगतार सामने आएंगे। इसी के साथ सूखा भी बढ़ेगा। मानसून की बारिश शुरू होते ही उत्तर प्रदेश के तराई इलाके बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा और सिद्धार्थनगर समेत पूर्वांचल के कई जिलों पर बाढ़ का संकट हर साल मंडराने लगता है। यही नहीं, जलावायु परिवर्तन की वजह से देश भर में बाढ़ की स्थितियां लगातार बढ़ रही हैं, जो आगे और बढ़ेंगी।

अधिकतम तापमान 0.15 डिग्री बढ़ गया

भारत में जलवायु परिवर्तन के असर के बाद वर्ष 1951 से 2015 के बीच वार्षिंक औसत अधिकतम तापमान 0.15 डिग्री बढ़ गया है, जबकि न्यूनतम तापमान 0.13 डिग्री बढ़ गया है। इसका मतलब है कि आगे दिन और रात अधिक गर्म होंगे। वर्ष 2019 में जुलाई से सितंबर के दौरान कम समय में अधिक बारिश होने से 14 राज्यों में बाढ़ से लाखों लोगों को नुकसान पहुंचा और अरबों की सम्पत्ति का नुकसान हुआ। इससे साफ है कि गर्म वातावरण से बाढ़ का बढ़ता खतरा और बढ़ रहा है।

अन्न उत्पादन पर भी असर

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1951-2015 तक भारत में होने वाली बारिश में गिरावट देखी गई है। बारिश में यह कमी सिंधु-गंगा के मैदान और पश्चिमी छोर पर भी देखी गई है। इन क्षेत्रों में बारिश कम होने से अन्न उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, पिछले 65 साल के मानसून के आंकड़ों के अध्ययन से निकल कर आया कि तेज बारिश के दिन बढ़े हैं, जिस कारण बाढ़ की स्थितियां अधिक सामने आ रही हैं। इसके लिए अधिक स्थानीय कारणों और भूमि उपयोग और एरोसोल की सघनता इसका एक बड़ा कारण है।

1953-2017 तक 1,07,487 लोगों की मौत

भारत में बाढ़ से 1953-2017 तक 1,07,487 लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्रीय जल आयोग की राज्य सभा में प्रस्तुत की गई एक रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ से 3,65,860 करोड़ रुपए की फसलों और सम्पत्तियों का नुकसान हुआ है।

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